गया । पिंडदानियों द्वारा मृतात्मा को समर्पित पिंड बाजारों में बेचा जा रहा है। पिंडवेदियों पर कर्मकांड समाप्त होते ही पिंड लेने के लिए छीनाझपटी मच जाती है। सुखाने के बाद यह पिंड सात से आठ सौ रुपये प्रति मन (40 किलोग्राम) की दर से बिक जाता है। सविता देवी एक पखवारे तक चलने वाले पितृपक्ष में बच्चों के साथ पिंड इकट्ठा करती हैं। वे बताती हैं कि धूप में सुखाने के बाद पिंड को बाजार में बेच देती हैं। सात से आठ सौ रुपये प्रति मन के दर से दुकानदार खरीद लेते हैं। पशुओं के चारा के लिए लोग इसे खरीदते हैं, क्योंकि पिंड पूरी तरह से जौ के आटा का होता है इससे दुधारु पशु अधिक दूध देती है। हालांकि, पिंड से जैविक खाद बनाने के लिए नगर निगम द्वारा अक्षयवट में मशीन भी लगाई गई है। मशीन एक दिन भी चालू नहीं हुई। नगर निगम के सहायक अभियंता शैलेंद्र कुमार सिन्हा का कहना है कि बिजली के लो वोल्टेज के करण मशीन नहीं चल रही है। इसकी शिकायत बिजली विभाग से की गई है। आपूर्ति बेहतर होते ही मशीन चालू हो जाएगी।

Posted By: Jagran

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