कभी माचिस तक मांगनी पड़ती थी, आज सैकड़ों बेटियों की जिंदगी रोशन कर रहीं गया की सरिता; ऐसी है संघर्ष की कहानी
वजीरगंज, गया की सरिता बर्णवाल ने गरीबी और सामाजिक बंदिशों को तोड़कर ब्यूटी पार्लर खोला और आत्मनिर्भर बनीं। आज वह ...और पढ़ें

ब्यूटी पार्लर में फेस मसाज करतीं सरिता बर्णवाल।
HighLights
गरीबी में माचिस के लिए भी संघर्ष किया।
ब्यूटीशियन बनकर खुद को आत्मनिर्भर बनाया।
सैकड़ों युवतियों को मुफ्त प्रशिक्षण देकर सशक्त किया।
रविभूषण सिन्हा, वजीरगंज (गया)। वजीरगंज की एक ऐसी बहू जिसने अपनी हिम्मत और हौसले से महिला सशक्तीकरण की नई कहानी लिख दी। नाम है सरिता बर्णवाल।
इनकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। जहां संघर्ष, अपमान, भूख और सामाजिक बंदिशों के अंधेरे को चीरकर एक महिला ने खुद को ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके की महिलाओं को रोशनी दिखाई।
जब चूल्हा जलाना भी था संघर्ष
शादी के बाद जब सरिता पहली बार ससुराल आईं, तो हालात देखकर किसी का भी दिल बैठ जाए। घर में गरीबी इस कदर थी कि चूल्हा जलाने के लिए माचिस तक दूसरों से मांगनी पड़ती थी।
अनाज के दाने-दाने को तरसना पड़ता था। पति की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा चुकी थी। नए-नए वैवाहिक जीवन की खुशियों की जगह सामने था सिर्फ अभाव और लाचारी का अंधेरा।
मगर सरिता ने हालात के आगे घुटने नहीं टेके। उन्होंने तय किया कि रोने से कुछ नहीं बदलेगा। बदलना है तो खुद को बदलना होगा। नवविवाहित होने के बावजूद उन्होंने संघर्ष का दामन थाम लिया।
ब्यूटीशियन का हुनर बना सहारा
सरिता ने ब्यूटीशियन का कोर्स सीखने का फैसला किया। हालांकि यह रास्ता आसान नहीं था। समाज की उंगलियां उठीं, ताने कसे गए, बंदिशें लगाई गईं। लेकिन सरिता का इरादा फौलादी था।
पति ने भी उनका साथ दिया। दोनों ने मिलकर छोटे स्तर पर ब्यूटी पार्लर शुरू किया। शुरुआत में ग्राहक कम थे, संसाधन नहीं थे। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी।

खुद जलीं और दूसरों के लिए रोशनी बनीं
सरिता ने सिर्फ अपने पैरों पर खड़ा होना नहीं सीखा। उन्होंने ठान लिया कि जिस दर्द से वो गुजरी हैं, उससे दूसरी बेटियों को नहीं गुजरने देंगी। उन्होंने क्षेत्र की दर्जनों जरूरतमंद, गरीब युवतियों को मुफ्त में ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग देनी शुरू की।
उनकी ट्रेनिंग सिर्फ मेकअप तक सीमित नहीं थी। वो लड़कियों को सिखातीं कि हालात से कैसे लड़ना है, आत्मनिर्भर कैसे बनना है, समाज की बेड़ियों को कैसे तोड़ना है।
देखते ही देखते सरिता का पार्लर एक ट्रेनिंग सेंटर बन गया। जिन लड़कियों को घर से निकलने की इजाजत नहीं थी, वो आज अपने दम पर कमा रही हैं। कई ने अपना पार्लर खोल लिया, कई शादियों-पार्टियों में अच्छा कमा रही हैं।
आज हालात ये हैं कि पूरा वजीरगंज क्षेत्र सरिता को महिला सशक्तिकरण का प्रतीक मानता है। जो लोग कभी उनके काम पर उंगली उठाते थे, आज वही अपनी बेटियों को सरिता के पास भेजते हैं कि 'दीदी से कुछ सीख लो'।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
आज सरिता उस जंजाल से कोसों दूर निकल चुकी हैं जहां कभी दाने दाने के लिए मोहताज थीं। अब उनका जीवन सुखमय है।
सबसे बड़ी जीत ये है कि उन्होंने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दिया। उनकी बेटी राजश्री एक प्रतिष्ठित कालेज से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रही है, जबकि बेटा राज रौशन इंजीनियरिंग कर रहा है।
प्रेरणा जो कभी नहीं बुझती
सरिता बर्णवाल की कहानी हमें सिखाती है कि हालात चाहे कितने भी बुरे हों, अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।
एक माचिस की तीली के लिए शुरू हुआ सफर आज सैकड़ों घरों में उजाला कर रहा है। सरिता सिर्फ एक ब्यूटीशियन नहीं हैं। वो हिम्मत का दूसरा नाम हैं।
