गया, कमल नयन। शेरघाटी में 11 उम्मीदवार चुनावी समर में ताल ठोक रहे हैं। वैसे यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। जदयू ने अपने विधायक विनोद प्रसाद यादव पर फिर भरोसा जताया है। वहीं राजद ने मंजू अग्रवाल को खड़ा किया है। लोजपा ने मुकेश कुमार यादव को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। जनअधिकार पार्टी के उम्मैर खां भी मुकाबले में डटे हैं। इसे जिला बनाए जाने का मुद्दा लंबे समय से छाया हुआ है। शांतिपूर्ण तरीके से आज यहां मतदान संपन्‍न हो गया।

2015 में हुए चुनाव में जदयू के विनोद प्रकाश यादव को 44579 वोट मिले थे। उनके मुकाबले हम के मुकेश कुमार यादव थे। विनोद प्रसाद यादव ने 4834 वोटों से जीत हासिल की। तब निर्दलीय रहते हुए भी मंजू अग्रवाल ने 29 हजार 671 वोट बटोरे थे। उससे पहले 2010 के चुनाव में निर्दलीय सुषमा देवी को हराकर जदयू के विनोद प्रसाद ने सीट हासिल की थी।

1977 में खत्म हुआ 2009 में अस्तित्व में आया

शेरघाटी विधानसभा में पहला चुनाव 1957 में हुआ था। उसके बाद 1977 में इसे बोधगया सुरक्षित विधानसभा का हिस्सा बना दिया गया। फिर 2009 में शेरघाटी विधानसभा अस्तित्व में आया। गुरुआ, बोधगया और बाराचट्टी के कुछ हिस्सों को काटकर इसका गठन किया गया था।

इस सीट पर 1957 में पहला चुनाव हुआ था। तब कांग्रेस के कैप्टन शाहजहां जीते थे। अगले चुनाव में भी कुर्सी उन्हीं के पास रही। 1967 में जेकेडी के एमए खान, 1969 और 1972 में जयराम गिरी निर्वाचित हुए। पहली बार निर्दलीय और उसके बाद कांग्रेस की सीट पर। जीटी रोड के दोनों ओर फैले इस विधानसभा क्षेत्र में शेरघाटी के अलावा आमस और डोभी प्रखंड के हिस्से आते हैं। शेरघाटी को जिला बनाए जाने की मांग लंबे समय से होती आ रही है। इसके अलावा सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा के मुद्दे भी हैं।

कब कौन जीता

1957- कैप्टन शाहजहां कांग्रेस

1962- कैप्टन शाहजहां कांग्रेस

1967- मुश्ताक अली खां जेकेडी

1969 जयराम गिरी निर्दलीय

1972- जयराम गिरी कांग्रेस

2010- विनोद प्रसाद यादव जदयू

2015- विनोद प्रसाद यादव जदयू

 

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