गया। कर्मकांड के लिए भगवान श्री विष्णु का चरण स्थल मुख्य है। देव परिधि का यह केंद्र बिंदू है। यहां अन्य वेदियों का विस्तार है। श्री विष्णु चरण परिसर में 16 वेदियां हैं। गुरुवार को रूद्रपद और ब्रह्मापद पिंडवेदी पर कर्मकांड को लेकर पिंडदानी पहुंचे। गयापाल पुरोहितों द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ कर्मकांड कराने का कार्य किया जा रहा था। सूर्य उदय होते ही पिंडदानी फल्गु नदी में स्नान एवं तर्पण कर हाथ में कर्मकांड की सामग्री लेकर विष्णुपद मंदिर परिसर में आने लगे। देखते-देखते वेदी पिंडदानियों से पट गया। विष्णुपद परिसर में ही 16 वेदी भी हैं।

उत्तर प्रदेश से आए पिंडदानी इंद्रदेव नारायण ने कहा कि छठे दिन का कर्मकांड रूद्रपद और ब्रह्मापद में किया। दोनों पिंडवेदियों पर कर्मकांड कर मन को काफी शांति मिल रही है, क्योंकि जो कर्मकांड हो रहा वह भगवान श्रीहरि के समक्ष हो रहा है। पिंडवेदी हाथी के आकार के हैं। इनमें 16 खंभे बने हैं। पिंडदानी पूर्वजों को मोक्ष दिलाने को लेकर कर्मकांड करने के बाद पिंड के विष्णुचरण में अर्पित कर रहे थे। माना जाता है कि हाथी के चरण चिह्न में सृष्टि के सभी जीवों के चरण समा जाते हैं। उसी तरह भगवान विष्णु के चरण की गरिमा में सभी देवों एवं ऋषियों की गरिमा समाहित है। कर्मकांड के लिए विष्णुपद मंदिर में प्रवेश को लेकर पिंडदानियों की लंबी कतारें लगी थीं। एक-एक पिंडदानी को गहन जांच के बाद मंदिर परिसर में जाने की अनुमति पुलिस द्वारा दी जा रही थी। इस कार्य में कई संगठन भी लगे थे ताकि मंदिर परिसर में प्रवेश में किसी तरह की परेशानी नहीं हो।

Posted By: Jagran

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