यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 04, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
खतरनाक विषाणुओं के संक्रमण से बचाने के लिए बकरियों को लगाया जाएगा पीपीआर वैक्सीन का टीका
स्वास्थ्य रक्षा पखबारा के अंतर्गत पशुपालन विभाग की ओर से बकरियों का टीकाकरण किया जाएगा। खतरनाक विषाणु से होने वाली ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, गया। स्वास्थ्य रक्षा पखबारा के अंतर्गत पशुपालन विभाग की ओर से बकरियों का टीकाकरण किया जाएगा। खतरनाक विषाणु से होने वाली बीमारियों से बकरियों को बचाने के लिए पीपीआर (पेस्टी डिस्पेस्टिीज रूमिनेंट) का टीका लगाया जाएगा। यह टीका बकरियों को कई तरह की गंभीर बीमारियों से रक्षा करता है। शुक्रवार से इस विशेष टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। गया जिले के सभी प्रखंडों की सभी पंचायतों में 5 से 15 मार्च तक टीकाकरण करने का कार्यक्रम रखा गया है।
निजी पशु स्वास्थ्य टीकाकर्मी घर-घर जाकर करेंगे टीकाकरण
पशुपालन विभाग में काम कर रहे निजी पशु स्वास्थ्य टीकाकर्मी घर-घर जाकर बकरियों का टीका करेंगे। टीका लगाने के लिए राज्य से वैक्सीन पर्याप्त संख्या में उपलब्ध करा लिया गया है।
विषाणु के संक्रमण की चपेट में आकर एक साथ मरने लगती है बकरियां
पशुपालन विभाग के नोडल पदाधिकारी डॉ. उपेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में पीपीआर का वैक्सीन लगाया जाएगा। वह बताते हैं कि साल में जनवरी-फरवरी में यह टीका लगाया जाता है। इस बार मार्च में यह टीकाकरण हो रहा है। टीका के फायदे के बारे में बताया कि यह विषाणुओंं के संक्रमण से बचाता है। वह बताते हैं कि कई बार इस बीमारी के कारण बकरी को तेज बुखार रहने लगता है। मुंह में छाले पड़ जाते हैं। इसके मुंह से लार भी गिरने लगता है। समय पर इलाज नहीं होने से बकरी मर जाती है। बीमार बकरी के संक्रमण की चपेट में आकर आसपास की दूसरी बकरियां भी मरने लगती है।
पीपीआर वैक्सीन कार्यक्रम का आज मानपुर में होगा उद्घाटन
पशुपालन विभाग की ओर से मानपुर में पीपीआर वैक्सीनेशन कार्यक्रम का उदघाटन शुक्रवार को किया जाएगा। भ्रमणशील चिकित्सा पदाधिकारी, चलंत डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि सुबह 10 बजे इस कार्यक्रम का उदघाटन किया जाएगा। मानपुर प्रखंड के बारागंधार पंचायत के शिखर गांव में प्रमुख के द्वारा इसका उदघाटन किया जाएगा। जिले भर में यह टीका लगाया जाएगा।
गरीबों की गाय कहलाती बकरियां
गांव-कस्बों में गरीब से गरीब परिवार जिनके पास कोई बड़े पशुधन नहीं होते हैं उनके लिए ये बकरियां गाय के रूप में मानी जाती है। गांव-देहात में इसे गाय की संज्ञा देते हैं। बकरी ऐसी जीव होती है कि इसे जो मिल जाए उसे खाकर गुजारा कर लेती है। यह थोड़ा दूध भी देती है। इससे गरीब परिवार का गुजारा हो जाता है। बकरियां समय पर बच्चे भी देती हैं जिसे बेचकर पशुपालक आर्थिक लाभ कमाते हैं। इनसे कईयों का परिवार चलता है। सरकार भी बकरी पालन के जरिए गरीबों को आर्थिक लाभ दिलाने के लिए कई योजनाएं चलाती है।
विषाणु जनित बीमारी के लक्षण
बकरी को तेज बुखार रहना
मुंह में छाले पड़ जाना
लार गिरना
भूख नहीं लगना
डायरिया हो जाना
