गया। भारत बंद के दौरान छह सितंबर को बेलागंज में बच्चों को गिरफ्तार कर हथकड़ी लगाने व हाजत में बंद रखने के विरोध में मंगलवार को ग्रामीणों ने शहर के चौक टावर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर जनाक्रोश मार्च निकाला।

जुलूस विभिन्न मार्गो से होता हुआ डीआईजी कार्यालय पहुंचा, जहां मुकेश शर्मा, राजीव प्रसाद कन्हैया और सुमंत कुमार के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने डीआईजी को ज्ञापन सौंपा। इनलोगों ने उस दिन की घटना की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठी-डंडे बरसाया। जाति विशेष को निशाना बनाकर कार्रवाई की गई। महेश शर्मा जैसे सामाजिक कार्यकर्ता वहां थे भी नहीं। निर्दोष लोगों का नाम प्राथमिकी में दर्ज कर दिया। शिष्टमंडल ने कहा कि बेलागंज थानाध्यक्ष, बीडीओ, एएसपी, एसडीओ व डीएसपी ने दर्जनों लोगों के साथ बच्चों और महिलाओं को भी नाहक मुकदमे में फंसाया है। प्रदर्शन स्थल से करीब दो किलोमीटर अंदर गांव में जाकर एक जाति विशेष की महिलाओं, लड़कियों व बच्चों को अमर्यादित तरीके से घसीटा और पीटा गया। नेताओं ने कहा कि बेलागंज के बीडीओ कुछ असामाजिक तत्वों को लेकर पूरी प्लानिंग के साथ घरों में प्रवेश करने के लिए सीढ़ी लेकर आए थे। जिनके घर का दरवाजा नहीं खुला, वैसे घरों में सीढ़ी से घुस गए। पुलिस ने नवजात को भी नहीं बख्शा। थाना लाकर नाबालिगों को पीटा गया और मनगढ़ंत केस बनाया गया। उन्हें हथकड़ी लगाकर कोर्ट ले जाया गया। नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, निर्दोषों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने और दोषी पुलिस पदाधिकारी व जवानों पर कार्रवाई करने की मांग की।

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कार्रवाई नहीं होने पर राजभवन मार्च

सामाजिक कार्यकर्ता राजीव कुमार कन्हैया ने कहा कि बेलागंज की घटना शर्मनाक है। अगर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो हल्ला बोल आंदोलन के तहत राजभवन मार्च किया जाएगा। उन्होंने बीडीओ, एएसपी, डीएसपी, एसडीओ को बर्खास्त करने की मांग की। जनाक्रोश मार्च में पूर्व मुखिया राम विनय शर्मा, महेश शर्मा, रंजेश कुमार, पिंटू शर्मा, मुकेश नारायण, अशोक शर्मा, पंकज कुमार, भोला शर्मा, पुनपुन कुमार, पवन सिंह, ओंकार कुमार, पूर्व प्रमुख राकेश कुमार, आरती देवी, मिथिलेश कुमार, सत्यजीत कुमार आदि शामिल थे।

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इनसे लगाई गई गुहार

बेलागंज के पीड़ित परिवारों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उच्च व उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, मुख्य सचिव, डीजीपी, आयुक्त मगध प्रमंडल व जिलाधिकारी गया को आवेदन भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

Posted By: Jagran