जागरण संवादाता, सासाराम (रोहतास)। प्रधानमंत्री सिंचाई कृषि योजना ग्रामीण क्षेत्र के महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में कारगर साबित हो रही है। जीविका समूह से जुड़ी हजारों महिलाएं इस योजना के तहत सब्जी की खेती के अलावा बकरी पालन समेत अन्य कार्य कर तकदीर व तस्वीर दोनों संवारने में जुटी हैं। इससे जहां उनके बीच एकता की भावना पैदा हो रही है, वहीं घर की आर्थिक स्थिति भी सुधर रही है। वे घर का खर्चा चलाने में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। इसके लिए महिलाओं को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। पिछले दिनों जलछाजन विकास कार्यक्रम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भूमि संरक्षण (कृषि अभियंत्रण) विभाग ने स्वयं सहायता समूहों को 25-25 हजार की चक्रीय सहायता राशि 564 जीविका समूहों के बीच प्रदान किया, ताकि वे अपने रोजगार को आगे बढ़ा सके।

कृषि आधारित रोजगार के लिए दी जाती है सहायता

भूमि संरक्षण विभाग के उपनिदेशक (कृषि अभियंत्रण) लालजी प्रसाद चौधरी की माने तो प्रधानमंत्री सिंचाई कृषि योजना व जल छाजन विकास के तहत जीविकोपार्जन के लिए प्रत्येक स्वयं सहायता समूहों को 25 हजार की चक्रिय राशि प्रदान दी जाती है, ताकि वे कृषि आधारित रोजगार कर जीविकोपार्जन चलाने के साथ-साथ अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सके। स्वावलंबी महिलाओं को लघु उद्योग व जीविकोपार्जन में सहायता मिल सके। इस राशि से समूह की महिलाएं सब्जी खेती, बकरी पालन समेत अन्य रोजगारपरक व्यवसाय कर अपनी आय को बढ़ाने का काम करेंगी।

समूहों के बीच 1 करोड़ 41 लाख रुपये का हुआ वितरण

जिन समूहों को राशि मुहैया कराई गई थी, उसमें शिवसागर के आलमपुर, कोनकी, उल्हो, मोहम्मदपुर, रायपुर चोर, सासाराम के सिकरियां व धौडाड़, चेनारी के मल्हीपुर, उगहनी व पेबंदी, नौहट्टा के यदुनाथपुर, तिलोखर व तियुरा खुर्द, रोहतास के उचैला, बकनौरा, बंजारी, रोहतासगढ़, रसुलपुर, नवाडीह, तेलकप, समहुता कोचस के चितैनी, कपसिया व कथराई व करगहर के बकसड़ा व सिवन पंचायत के 564 जीविका समूह शामिल थे। जिसके बीच 1.41 करोड़ रुपये का वितरण किया गया।

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