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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 07, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Pitru Paksha: सार्थक हुआ दैनिक जागरण का 'फल्गु मांगे पानी' अभियान, ये हैं गया के रबर डैम से जुड़ी 10 खास बातें

By Prashant Kumar PandeyEdited By:
Published: Wed, 07 Sep 2022 10:36 PM (IST)Updated: Thu, 08 Sep 2022 10:02 AM (IST)

Pitru Paksha 2022 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव गुरुवार को गया में फल्गु नदी पर विष्णुपद मंदिर के ...और पढ़ें

गया का रबर डैम एवं उसके ऊपर स्‍टील का बना पैदल पुल। Pic: jagran.com
गया का रबर डैम एवं उसके ऊपर स्‍टील का बना पैदल पुल। Pic: jagran.com

गया, जागरण संवाददाता। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव गुरुवार को गया की मोक्षदायिनी फल्गु नदी पर विष्णुपद मंदिर के पास गयाजी डैम (रबर डैम) तथा विष्‍णुपद घाट से सीताकुंड तक जाने के लिए बने स्टील ब्रिज का लोकार्पण और पितृपक्ष मेला महासंगम 2022 का उद्घाटन करेंगे। आख़िर क्यों महत्वपूर्ण है यह रबर डैम और दैनिक जागरण की इसमें क्या भूमिका रही है, जानिए...

  1. रबर का बना देश का सबसे लंबा डैम

    बिहार के पहले एवं देश के सबसे लंबे रबर डैम का निर्माण फल्गु नदी पर किया गया है। इसकी लंबाई 411 मीटर है। पानी को रोकने के लिए रबर बैलून का प्रयोग किया गया है। यह फल्गु नदी के सतही प्रवाह को रोकने के लिए तीन मीटर ऊंचा एवं 411 मीटर लंबा भारत का सबसे लंबा रबर डैम है, जिसमें 65- 65 मीटर लंबाई के छह स्‍पैन हैं। इसके रबर ट्यूब में आधुनिक स्वचालित विधि से हवा भरी एवं निकाली जा सकती है, जिससे फल्गु नदी के जल के प्रवाह एवं भंडारण को प्रभावी रूप से संचालित किया जा सकेगा।

  2. अब फल्‍गु नदी में साल भर रहेगा पानी

डैम में 25 सौ घनमीटर पानी सालों भर उपलब्ध रहेगा। नदी में देवघाट से लेकर आईटीआई तक जल भरा रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार अभी तक धरती के अंदर जल-प्रवाह वाली इस नदी में कभी भी तीन फीट से कम जल नहीं रहेगा।

  • पिंडदानियों को नहीं होगी जल की कमी

  • ज्ञान एवं मोक्ष की पावन भूमि तथा धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण गया में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। यहां की फल्‍गु नदी में अपने मृत पूर्वजों को मोक्ष दिलाने की कामना के साथ पिंडदान, स्नान एवं तर्पण का खास महत्‍व है, लेकिन विष्णुपद मंदिर के निकट नदी में सतही जल प्रवाह बरसात के कुछ भाग को छोड़कर शेष दिनों में नगण्य रहता था। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती थी। अब इसका समाधान कर दिया गया है। श्रद्धालु रबर डैम के जल का उपयोग करेंगे।

  • गया पेयजल संकट भी हो जाएगा दूर

  • डैम बन जाने से गया शहर के पेयजल संकट दूर होगा। यहां गर्मी अलावा अन्य दिनों में भी पानी का लेयर काफी नीचे चला जाता था। सालों भर पेयजल की किल्लत से शहर जूझता था। फल्गु के पूर्वी और पश्चिमी तट पर बसे गया शहर के लोग प्यास बुझाने के लिए भटकते थे। डैम बन जाने से यह संकट समाप्त हो गया है। सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि डैम बनने के बाद भूजल स्‍तर में करीब 12.14 फीट की बड़ी वृद्धि हुई है।

  • शहर को मिली जल प्रदूषण से मुक्ति

  • फल्गु नदी गंदगी डालने का स्टोर बन गई थी। गया नगर निगम के 13 बड़े नाले फल्गु में गिराए जाते थे। बिहार राज्य  प्रदूषण बोर्ड ने फल्गु को साफ रखने के लिए इन नालों को बंद करने का सुझाव दिया था। अब डैम बन जाने के बाद दक्षिण की ओर से आने वाले मनसरवा नाला के पानी को अलग रास्ता देकर नदी के डाउनस्‍ट्रीम में मिला दिया गया हे। इससे प्रदूषित जल शहर से दूर जा रहा है। फल्‍गु के घाटों पर शुद्ध पानी मिल रहा है। नदी से सटे स्थित श्मशान घाट पर आम लोग अपने सुविधा के मुताबिक नदी में हीं शवदाह करते थे, लेकिन निगम के आधुनिक शवदाह गृह का निर्माण कराने के बाद नदी के पेटे में शव जलाना बंद हो गया है।

  • पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं

  • परंपरागत कंक्रीट डैम के स्थान पर आधुनिक तकनीक पर आधारित रबर डैम के निर्माण का पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसकी योजना की पूरी रूपरेखा आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों द्वारा स्थल निरीक्षण के उपरांत दिए गए परामर्श को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई।

  • सीताकुंड पिंडवेदी की दूरी हुई कम

  • विष्णुपद देवघाट से पूर्वी तट पर बनी पिंडवेदी जाने की दूरी कम गई है। पहले बाईपास होकर निजी वाहन से जाना पड़ता था। कुछ श्रद्धालु पैदल नदी पार कर भी जाते थे। अब डैम के ऊपर स्‍टील पैदल पुल बन गया है। इससे श्रद्धालु देवघाट में कर्मकांड करने के बाद सीताकुंड पिंडवेदी का दर्शन करने जा सकते हैं। इस पैदल पुल ने पहले की तीन किलोमीटर की दूरी को 1.4 किलोमीटर तक सिमटा दिया है।

  • पर्यटन को बढ़ावा, रोजगार भी बढ़ेगा

  • देश के सबसे लंबे रबर डैम के बनने और इसमें सालोंभर पानी भरे रहने पर पर्यटक आकर्षित होंगे। डैम के पानी में नौका विहार का अवसर मिलेगा। स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

  • समय से पहले बना, 266 करोड़ खर्च

  • रबर डैम का शिलान्यास बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरीए अक्टूबर 2020 में किया था, जिसे अक्‍टूबर 2023 में पूरा होना था। लेकिन जल संसाधन विभाग के अभियंताओं के प्रयास से इसे 13 माह पहले ही पूरा कर लिया गया। इसके निर्माण पर 266 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

  • दैनिक जागरण का अभियान सफल

  • अनुश्रुतियों पर विश्‍वास करें तो फल्‍गु नदी में हजारों साल बाद पानी आया है। दैनिक जागरण ने फल्गु की व्यथा पर एक अभियान चलाया था। इसका नाम था- फल्गु मांगे पानी। इसके तहत गया शहर के आवाम को जोड़ा गया। सड़कों पर रैली निकली और देवघाट लैंप जले। पांच साल तक लगातार फल्गु की दुर्दशा पर लिखा गया। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने फल्गु नदी की एक रिपोर्ट बिहार राज्य प्रदूषण बोर्ड को भेजा। उसने कई सलाह दिए। 'प्रतिज्ञा' संस्था द्वारा पटना उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई। प्रधानमंत्री को पूर्व विधान पार्षद कृष्ण कुमार सिंह ने अखबार में छपे आलेख सौंपे। आज दैनिक जागरण का 'फल्गु मांगे पानी' अभियान भी सार्थक हुआ है।