जागरण संवाददाता, गया: गयाजी के पितृपक्ष मेले के समापन में दो दिन शेष रह गए हैं। शुक्रवार की शाम मेला का प्रमुख केन्द्र विष्णुपद मंदिर और फल्गु तट पर पितृ दीवाली मनाई गई। एक पखवारे तक पिंडदान का कर्मकांड करने वाले श्रद्धावान पुत्र अपने पितरों के स्वर्ग मार्ग को प्रकाशमय करने के लिए यह प्रकाश करते हैं। उनका मानना है कि पितरों के राह में अंधेरा न हो। सब जगह उन्हें प्रकाश मिले और वे खुश होकर आशीर्वाद दें। इसी मान्यता को विष्णुपद में प्रतिवर्ष पितृपक्ष मेला के 14वीं तिथि को पितृ दीवाली के रूप में मनाया जाता है।

विष्णुपद लग रहा काफ़ी आकर्षक 

विष्णुपद मंदिर को पुष्प गुच्छ से सजाया गया है। काफी आकर्षक है। यहां शाम के वक्त श्रद्धालु विष्णु चरण का दर्शन और नमन करते हैं। पूरे परिसर में दीपोत्सव त्योहार जैसा लग रहा है। कहीं घृत दीप तो कहीं शुद्ध तेल के दीप जलाए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं का परिवार अपने-अपने पितरों को स्मरण कर उनके नाम से दीप का प्रज्जवलित कर रहे हैं। सबसे ज्यादा आकर्षण फल्गु नदी के तट पर देखने को मिल रहा है। जहां कतारबद्ध दीप जले हैं। हर्षोल्लास का माहौल है। कुछ जगह फुलझड़ियां भी छूट रही हैं। 

इससे उनके पितृ खुश होंगे

श्रद्धालुओं के साथ बच्चे भी हैं। ऐसा लगता है मानो पितृ अपने स्वजनों को इंहलोक पर देखकर प्रसन्न हो, यह सारे कर्म किए जा रहे हैं। पितरों को भी यह लगता है उनके स्वजन उनके लिए मार्ग को प्रकाशमय कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से 70 श्रद्धालुओं का मुंडालिया गर्ग परिवार पितृ दीवाली के इस मौके पर अपने पितरों को नमन कर दीप जलाए। परिवार के लोगों ने कहा कि इससे उनके पितृ खुश होंगे।

पितृ दीवाली की मान्यता बढ़ रही 

पितृ दीवाल के संबंध में गया तीर्थ पुरोहित पीतल किवाड़ वाले पंडाजी महेश लाल गुपुत बताते हैं कि पितरों को अंधेरे का सामना न करना पड़े। स्वर्ग के मार्ग को प्रकाशित करने का कार्य पुत्र करते हैं। यह दीपावली जैसा त्योहार दिखता है। पितृ दीवाली की मान्यता बढ़ रही है। श्रद्धालु किशोर काफी संख्या में आकर्षित हो रहे हैं। आचार्य लाल भूषण मिश्र का भी मानना है कि दीपावली का यह पर्व लोकमान्यता है। यह पिंडदानियों द्वारा किया जाता है।

Edited By: Prashant Kumar Pandey

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट