गया। किसान संघर्ष समिति के आह्वान पर मंगलवार को प्रखंड के पाईबिगहा बाजार पूर्ण रूप से बंद रहा। किसान संघर्ष समिति के द्वारा आहूत एक दिवसीय बाजार बंदी का पाईबिगहा के व्यवसायियों का जबरदस्त समर्थन मिला। बाजार के सभी छोटे-बड़े व्यवसायियों ने अपने अपने प्रतिष्ठान स्वत: बंद रखा। बंद का आसपास के क्षेत्रों के दिनचर्या पर खासा प्रभाव पड़ा। बाजार आए लोगों को बगैर खरीददारी किए वापस लौटना पड़ा। हालांकि दवा दुकान, दूध प्रतिष्ठान सहित आवश्यक सेवाएं और यातायात को बंद के दायरे से दूर रखा गया था।

पाईबिगहा को प्रखंड बनाने, बाजार में सरकारी स्तर से संचालित एपीएचसी को पीएचसी का दर्जा देने, पाई बिगहा ओपी को थाना में अपग्रेड करने, दरधा नदी पर पुल निर्माण कराने और पाईबिगहा बस पड़ाव को सुसज्जित करने की पांच सूत्री मांगों को लेकर पिछले बीस दिन से किसान संघर्ष समिति के बैनर तले अनिश्चित कालीन धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। संघर्ष समिति के आह्वान पर मंगलवार को पाईबिगहा बाजार पूर्ण रूप से बंद रहा। समिति के बैनर तले आक्रोश मार्च निकाला गया। जिसने सरकार और सरकारी व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इस दौरान अपने संबोधन में संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजय कुमार ने कहा कि आजादी के सात दशक बाद पाईबिगहा बाजार का कोई समुचित विकास नहीं हुआ है। चाहे स्थानीय जनप्रतिनिधि हो या कोई बाद नेता किसी ने उक्त बाजार कायाकल्प का कोई पहल नहीं किया। यहां के लोग विकास के नाम ठगा महसूस कर रहे हैं। संघर्ष समिति के अध्यक्ष मंजय कुमार ने कहा कि अपने हक की मांगों को लेकर पिछले बीस दिनों से क्षेत्र के लोग अनिश्चित कालीन धरना पर बैठे हैं। मगर अभी तक न तो कोई अधिकारी लोगों के मांग को सुनने आए हैं और न हीं कोई नेता या जनप्रतिनिधि। उन्होंने कहा कि अब आंदोलन तेज होगा, उसी आंदोलन के बीच आज पाईबिगहा बाजार को बंद रखा गया है।

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