गया : कोरोना संक्रमण ने कोहराम मचा रखा है। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने पर जांच के लिए ऑक्सीमीटर का उपयोग किया जाता है। जो वर्तमान में बाजार से आउट हो चुका है। क्योंकि ऑक्सीमीटर का उपयोग इस कोरोना संक्रमण काल में थर्मामीटर की भांति हर घर में होने लगा है। कुछ महीने पहले जहां इसकी बाजार में न के बराबर बिक्री थी। आज मांग कई गुना बढ़ गई है। ऑक्सीमीटर पल्स रेट और शरीर में ऑक्सीजन के बारे में रिकॉर्ड करता है। जब कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित होता है, तो उसका ऑक्सीजन लेवल कम हो सकता है। उसे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। ऐसे में लोग कोरोना से संक्रमित होने की आशंका को देखते हुए ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन की मात्रा नापते हैं।

दवा मंडी में ऑक्सीमीटर के थोक विक्रेता मुकेश कुमार ने कहा कि दस दिन पहले तक ऑक्सीमीटर का मांग बाजार में काफी कम था। लेकिन कुछ दिनों में मांग में अचानक उछाल आ गई। जिसका मुख्य कारण कोरोना संक्रमण का बढ़ना है। उन्होंने कहा कि कंपनी के अनुसार ऑक्सीमीटर का दाम थोक बाजार में आठ सौ रुपये लेकर 1200 रुपये तक है। लेकिन खुदरा में दो हजार रुपये तक एक ऑक्सीमीटर का दाम लिया जा रहा है। जो बिलकुल गलत है। साथ ही बाजार से ऑक्सीमीटर गायब हो गया है।

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लॉकडाउन के कारण बाजार में कम आ रहा ऑक्सीमीटर शहर की दवा मंडी में ऑक्सीमीटर सबसे अधिक दिल्ली और मुंबई से आता है। लेकिन दोनों शहर में लॉकडाउन लगने से गया में ऑक्सीमीटर नहीं आ रहा है। फिर भी उम्मीद की जा रही है कि एक सप्ताह में काफी संख्या में ऑक्सीमीटर शहर में आ जाएगा। क्योंकि ऑक्सीमीटर बनाने वाले देश में बहुत सारी दवा कंपनी है। एक सप्ताह में ऑक्सीमीटर की किल्लत दूर हो जाएगी।

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ऑक्सीमीटर शरीर के ऑक्सीजन नापने का कारगर यंत्र शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. मृत्युंजय कुमार सिंह का कहना है कि पल्स ऑक्सीमटर शरीर के ऑक्सीजन नापने के लिए कारगर यंत्र है। इस समय प्रत्येक घरों में ऑक्सीमीटर होना चाहिए। जिससे शरीर के ऑक्सीजन नापा जा सके। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल 95 से 100 के बीच दिखाई दे तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन अगर यह 92 या उससे नीचे दिखे तो ऐसे स्थिति में तुरंत चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

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