राजेश प्रसाद, पकरीबरावां (नवादा)। आस्था और भक्ति का एक ऐसा जज्बा, जहां भक्त माता की प्रतिमा का निर्माण के लिए 25-25 वर्षों तक का इंतजार करते हैं । जिस श्रद्धालु को प्रतिमा निर्माण की अनुमति मिल जाती है, वह अपने आप को धन्‍य मान लेता है। प्रतिमा निर्माण के लिए यहां नंबर लगता है। प‍िछले वर्ष जिन लोगों ने नंबर लगाया है, उन्‍हें 2044 में प्रतिमा निर्माण कराने का अवसर मिल सकेगा। बात हो रही है नवादा जिले के पकरीबरावां प्रखंड की ढ़ोढ़ा पंचायत के रेबार गांव की। इस मंदिर में प्रतिमा निर्माण के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। माता के प्रति आस्‍था इतनी है कि दूर-दूर से लोग यहां नवरात्र के दिनों में पहुंचते हैं। 

1923 से हो रही है माता की आराधना 

कहा जाता है कि मंदिर अंग्रेजों के समय से है। पूजा समिति के अध्यक्ष रघुनंदन प्रसाद बताते हैं, कि 1923 से दुर्गा मंदिर में पूजा अर्चना का कार्य लगातार चलता रहा है। गांव के प्रवेश द्वार पर मंदिर का निर्माण किया गया है, जहां शारदीय नवरात्र के अवसर पर प्रत्येक वर्ष मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। 1995 से पूर्व प्रतिमा निर्माण का कार्य लोगों के आपसी सहयोग से किया जाता था। जब से इस मंदिर में श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी होने लगी, तब से श्रद्धालु प्रतिमा निर्माण पर खर्च होने वाली पूरी राशि देने लगे। ऐसे में एक ही वर्ष में श्रद्धालुओं की संख्‍या इतनी हो गई कि नंबर सिस्‍टम आरंभ करना पड़ा। तब से अब तक नंबर के आधार पर श्रद्धालुओं को मौका मिलता है। 

आस्‍था ऐसी कि दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

यहां बिहार-झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों से भी भक्‍त आते हैं। रेवार के अधिकांश लोग बिहार एवं दूसरे प्रदेश में बड़े ओहदे पर पोस्टेड हैं। नवरात्र में सभी माता के दर्शन के लिए जरूर पहुंचते हैं। इस वर्ष 2021 में तुर्कवन गांव निवासी नारायण यादव के पुत्र बिजली विभाग में कनीय अभियंता विद्यासागर का नंबर है। लंबे इंतजार के बाद उन्हें यह मौका मिला है। विद्यासागर ने बताया कि उन्होंने मां से जो मांगा वह पूरा हो गया है, इसलिए मां की प्रतिमा बनाने का निर्णय लिया है। बीते वर्ष धमौल बाजार निवासी तालकेश्वर विश्वकर्मा के पुत्र मिथिलेश कुमार ने प्रतिमा का निर्माण कराया था।लगभग दो हजार वर्ग फुट में मंदिर का निर्माण किया जा चुका है। मंदिर निर्माण में सहयोग करने वाले बैजनाथ सहाय के परिवार आज भी गांव से दूर रहने के बावजूद दुर्गा पूजा के अवसर पर जरूर शामिल होते हैं। कई जिलों से लोग आकर यहां मन्नत मांगते है और नंबर आने पर मूर्ति का निर्माण कराते हैं।  

ऐसे पहुंचे रेवार माता के मंदिर

नवादा जिले के पकरीबरावां प्रखंड अंतर्गत रेवार गांव शेखपुरा एवं जमुई जिले की सीमा पर अवस्थित है। नवादा जिला मुख्यालय से इसकी दूरी लगभग 40 किमी है, जबकि शेखपुरा जिला मुख्यालय से  18 किमी है। जमुई से 52 किमी की दूरी पर है। नवादा एवं जमुई से आने वाले श्रद्धालु आढ़ा मोड़ से धमौल बाजार होते हुए रेवार पहुंच सकते हैं। वहीं, शेखपुरा के तरफ से आने वाले श्रद्धालु शेखपुरा से महुली बाजार होते हुए सीधे रेवार पहुंच सकते हैं। सचिव सुजीत कुमार और पुजारी विकास पांडेय कहते हैं कि यह भक्‍तों की आस्‍था का केंद्र है। 

 

Edited By: Vyas Chandra