गया। मगध आब्स एंड गाइनेकोलाजिकल सोसाइटी (मोग्स) गया के द्वारा महिलाओं में स्तन कैंसर की समस्याओं पर एक सेमिनार किया गया। कार्यक्रम में चेयरपर्सन के रूप में वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ डा. रामाधार तिवारी, वरिष्ठ सर्जन डा. रतन कुमार, डा. आलोक जैन तथा स्पीकर के रूप में पटना से आये कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. वीपी सिंह ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि अपने देश में जागरुकता की कमी स्तन कैंसर का एक मुख्य कारण है। महिलाएं इस बारे में बात करने और बताने में संकोच करती है। इस विषय को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी और विभिन्न भ्रांतियों के कारण स्तन कैंसर के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

स्तन कैंसर की शुरुआत में स्तन में एक गांठ बनती है। जैसे ही गांठ समझ में आए, उसी वक्त चिकित्सक से संपर्क किया जाए, लेकिन महिलाएं उस पर ध्यान नहीं देतीं और जब गांठ की कोशिकाएं बढ़ कर ट्यूमर का रूप ले लेती हैं तो महिलाएं इलाज के लिए आती हैं। उनका कहना है कि पहले स्टेज में 80 प्रतिशत मरीजों को बचाया जा सकता है। वहीं बीमारी के दूसरे स्टेज में 60-70 प्रतिशत महिलाओं का सफल इलाज संभव है। लेकिन तीसरे व चौथे स्टेज में इलाज बेहद कठिन हो जाता है, क्योंकि तब तक कैंसर की कोशिकाएं काफी फैल चुकी होती हैं।

मुख्य कारणों में उचित खानपान का ना होना, मोटापा, अल्कोहल का प्रयोग, अनुवांशिक रूप से कैंसर का होना आदि है। इससे बचने के लिए स्वयं से स्तन की जांच करना, रेगुलर व्यायाम, प्रोटीन युक्त भोजन लेना चाहिए। गांठ होने की स्थिति में जल्द से जल्द अनुभवी चिकित्सक से राय लेनी चाहिए।

इस मौके पर डा. पूनम सहाय, डा. अमिता सिन्हा, डा. रीना सिंह, डा. सुनीता शर्मा, डा. जयश्री सिन्हा, डा. रेनू सिंह, डा. कुसुम सिंह, डा. अनुपम कुमार चौरसिया, डा. पल्लवी प्रिया, डा. एकता वर्मा, डा. रिचा भारद्वाज, डा. तेजस्वी नंदन, डा. संध्या कुमारी, डा. सुषमा सिंह, डा. शाइस्ता इकबाल तथा एसोसिएट मेंबर डा. डीके सहाय, डा. यूएस अरुण, डा. मुरलीधर अग्रवाल, डा. केके सिन्हा, डा. एसएन सिंह, डा. अमित कुमार एवं अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे। संचालन सचिव डा. पूनम सहाय एवं धन्यवाद ज्ञापन डा. अमिता सिन्हा ने किया।

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