विश्वनाथ प्रसाद, मानपुर

यहां न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त कमरे। पीने के लिए स्वच्छ पानी नहीं तो खेल मैदान नहीं होने के कारण बच्चे फल्गु नदी में खेलते हैं। छात्र-छात्राओं के लिए महज एक शौचालय।

हम बात कर रहे हैं मानपुर के मध्य विद्यालय जनकपुर की। इस विद्यालय समस्याओं का अंबार है। शुरुआत में विद्यालय कमेटी के आधार पर चलाई गई। बच्चों की बेहतर शिक्षा को देखकर सरकार ने वर्ष 1971 में विद्यालय को मान्यता दे दी। उसी वक्तदो मंजिला भवन बनाया गया, जिसमें चार कमरे हैं। एक कमरे में भोजन व अन्य सामग्री रखी जाती है। तीन कमरे में ही पहली से आठवीं तक की कक्षाएं लगती हैं।

विद्यालय में पहली से आठवीं तक 260 विद्यार्थी नामांकित हैं। इन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए महज 4 शिक्षक नियुक्त हैं। इनमें से एक शिक्षिका को प्रधानाध्यापक बनाया गया। उन्हें बीएलओ का भी कार्यभार सौंपा गया है। तीन शिक्षक ही 260 बच्चों को पढ़ाते हैं। वहीं, एक कमरे में बेंच-डेस्क हैं, जिस कारण अधिकतर बच्चे जमीन पर बैठ कर पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल में खेलने के लिए मैदान है ही नहीं।

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सिर्फ 171 विद्यार्थियों

के ही खुले हैं खाते

विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को पुस्तक, ड्रेस एवं छात्रवृति की राशि उनके खाते में सरकार द्वारा दी जाती। इसके लिए 171 विद्यार्थियों का खाता मानपुर स्थित बैंक में खोला गया। शेष विद्यार्थियों के खाते खोलवाने की प्रक्रिया चल रही है।

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विद्यालय में कमरे की काफी कमी है। तीन कमरे में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को बैठाया जाता। इसके कारण बेहतरीन शिक्षा देने के बाद भी शिक्षक द्वारा बतलाई गई बात समझ में नहीं आती।

परी कुमारी, कक्षा आठवीं

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विद्यालय में पेयजल की काफी किल्लत है। एक चापाकल है, जो दूषित पानी देता। अगर समरसेबुल लगा दिया जाए तो शुद्व जल मिलना शुरू हो जाएगा।

-मधु कुमारी, कक्षा छह

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विद्यालय में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय होनी चाहिए। यहां एक ही शौचालय है। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

नेहा कुमारी, कक्षा सात

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पठन-पाठन के साथ खेल भी जरूरी है। विद्यालय का अपना खेल परिसर नहीं होने के कारण यहां के विद्यार्थी को खेलने के लिए फल्गु में जाना पड़ता।

-करण प्रकाश, कक्षा पांचवी

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विद्यालय भवन, शौचालय, पेयजल के लिए समरसेबुल की मांग कई बार संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन स्थिति ज्यों के त्यों है। बैंक कर्मियों की लापरवाही के कारण सभी विद्यार्थियों का खाता नहीं खुला। इसके कारण सरकारी अनुदान की राशि सभी विद्यार्थियों के खाते में नहीं जा रही है। -पूनम कुमारी, प्रभारी प्रधानाध्यापक

Posted By: Jagran