संवाद सूत्र, रामगढ़ (भभुआ)। प्रखंड मुख्यालय के बिस्कोमान भवन पर सरकारी खाद लेने के लिए किसानों की अभी से लंबी लाइन लगनी शुरू हो गई है। जबकि अभी खरीफ का सीजन भी शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में किसानों द्वारा खाद को लेकर बिस्कोमॉन भवन पर मारामारी शुरू हो गई है।

इस वक्त डीएपी खाद की बजाए ज्यादातर किसान यूरिया खाद के लिए पहुंच रहे हैं। जबकि अभी यूरिया खाद की भी खपत कहीं नहीं है। फिर भी किसान न जाने क्यों खाद को लेकर परेशान हैं। खाद के लिए किसान बिस्कोमॉन भवन पर लाइन में गोदाम खुलने से एक घंटे पहले ही लग गए। शारीरिक दूरी की बात तो दूर यहां अधिकतर किसान मास्क ही नहीं लगाए थे, जबकि खाद की उपयोगिता इस समय नहीं है।

वहीं यूरिया व डीएपी खाद बाजार के खाद दुकानों पर भी उपलब्ध है। जिसका रेट प्रशासनिक अधिकारी द्वारा निर्धारित है। फिर भी दुकानदार किसानों को निर्धारित रेट पर खाद नहीं देते। जिसके कारण किसानों को बाजार की बजाए बिस्कोमान भवन पर खाद लेने के लिए लाइन लगानी पड़ती है। ऐसी हालत में शारीरिक दूरी की बात करनी बेमानी ही लगती है। बहरहाल यूरिया व डीएपी खाद को लेकर कोरोना काल में बढ़ती बिस्कोमॉन भवन पर भीड़ चिंता का सबब न बन जाए इसकी चिंता आम जनमानस में घर कर गई है।

बिस्कोमान भवन में पांच दिन में आवंटित 39 सौ बोरी यूरिया खाद समाप्ति के कगार पर है। एक दिन बाद बाद डीएपी खाद भी बिस्कोमॉन भवन से खत्म हो जाएगी। केवल एनपीके 12.32.16 खाद का स्टॉक ही बचेगा। यानि दो दिन बाद किसान खाद को लेकर बिस्कोमॉन भवन पर नजर नहीं आएंगे। नरहन के किसान राणा सिंह, लबेदहां के आनंद सिंह व छेवरी के महेन्द्र पांडेय आदि किसानों ने बताया कि 265 रुपए प्रति बैग बिस्कोमॉन भवन में यूरिया खाद मिलती है।

यही खाद बाजार में 320 रुपए से 350 रुपए प्रति बैग मिल रही है। ऐसे में किसानों को लगभग सौ रुपए का चूना एक बोरी पर लगता है। कमोबेश यही स्थिति डीएपी खाद की है। इस संबंध में बिस्कोमान भवन के प्रबंधक अजय सिंह ने बताया कि यूरिया खाद के लिए ज्यादा भीड़ हो रही है। हालांकि, डीएपी खाद भी एक दो दिन में खत्म हो जाएगी। एनपीके खाद अभी पर्याप्त मात्रा में है। प्रति किसानों को आधार कार्ड पर दस बोरी यूरिया खाद दी जा रही है।

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