संवाद सूत्र, कुदरा(कैमूर)। कुदरा अंचल से होकर गुजरने वाली नदियों में अवैध और मनमाने तरीके से खनन (Illegal Mining) का सिलसिला थम नहीं रहा। इस कारण नदियों का स्वरूप तेजी से बिगड़ता जा रहा है। अतीत में आसपास के ग्रामीणों के लिए जीवनदाई साबित होने वाली ये नदियां अब उनके लिए परेशानी का सबब बनती जा रही हैं। नदियों में खनन के लिए कई दिशा निर्देश हैं। संबंधित कार्यालय व अधिकारी भी हैं। लेकिन यह तंत्र इलाके की नदियों में अवैध खनन को रोकने में सफल साबित नहीं हो रहा है। कुदरा प्रखंड से होकर जो नदियां गुजरती हैं उनमें कुदरा, दुर्गावती और गोरेया शामिल हैं।
गुणवत्‍तापूर्ण बालू के लिए कुदरा नदी में होता खनन
कुदरा नदी का काफी महत्व है। उसी के नाम पर इस अंचल का नाम कुदरा पड़ा है। यहां का प्रखंड मुख्यालय भी इसी नाम से जाना जाता है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि कुदरा नदी प्रखंड की पहचान है। अपने बालू की गुणवत्ता की दृष्टि से भी इस नदी का महत्व है। इलाके में सोन नदी के बालू के बाद सबसे अधिक मांग कुदरा नदी के बालू की ही होती है। भवन निर्माण व अन्य संबंधित कार्यों के लिए इसकी गुणवत्ता को उपयुक्त माना जाता है। यही कारण है कि अंचल में सबसे अधिक  अवैध खनन इसी नदी में होता है। इसके चलते इसका स्वरूप इतना अधिक बिगड़ गया है कि पूर्व के समय में छिछली मानी जाने वाली यह नदी अब अनेक जगहों पर 30 से 40 फीट तक गहरी हो गई है। नदी के वर्तमान खतरनाक स्वरूप से अनजान लोग कभी-कभी नदी की गहराई में डूब जाने के चलते अपनी जान तक गंवा बैठते हैं।
कुदरा नदी में डूब गया था पशुपालक
नदी के खतरनाक स्वरूप के चलते ही कुछ वर्ष पूर्व अधौरा थाना के आथन गांव के नौकाडीह टोला के निवासी तुलसी उरांव नामक पशु पालक की स्थानीय थाना क्षेत्र के सरेयां गांव के पास डूबने से मौत हो गई थी। पहाड़ी इलाके में चारा व पानी की कमी होने पर वह अपने मवेशियों के साथ कुदरा अंचल के मैदानी इलाके में आकर ठहरा हुआ था। कुदरा नदी में एक दिन अपनी भैंसों को धोने व पानी पिलाने के लिए उतरा तो डूब गया।
बेतरतीब खनन से जानलेवा बन गई हैं ये नदियां
इलाके से होकर गुजरने वाली दुर्गावती नदी का स्वरूप बिगड़ने से भी लोगों को जान गंवानी पड़ रही है। हाल के वर्षों में स्थानीय थाना क्षेत्र के डेरवां गांव में नवनिर्मित पुल के पास नदी में डूब कर दो लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि नदी पुल के निर्माण के दौरान गलत तरीके से खनन किए जाने के चलते नदी में गहरी खाई जैसी संरचना बन गई है जिसमें गिरकर लोग जान गवां बैठते हैं। नदियों में अवैध खनन के चलते आसपास के किसानों को भी परेशानी हो रही है। उनकी जमीन और फसल दोनों बर्बाद होती है। वैना गांव के कमला कांत उपाध्याय बताते हैं कि उनके गांव के समीप कुदरा नदी के घाट में दिन रात अवैध खनन हो रहा है। मना करने पर भी अवैध खनन करने वाले नहीं मानते हैं। अवैध खनन करने वाले अब तो नदी के किनारे मौजूद उनके खेतों में भी जबरन खुदाई करना शुरू कर दिए हैं। खनन विभाग से बगैर नीलामी व पर्यावरणीय स्वीकृति लिए जोर जबरदस्ती से खनन हो रहा है, फिर भी संबंधित विभाग मौन है।

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