औरंगाबाद,जागरण संवाददाता। जुलाई में औसत से कम बारिश होने के कारण किसानों के साथ कृषि विभाग के अधिकारियों के होश उड़ गए हैं। स्थिति यह है कि किसान खेतों में धान रोपनी को तैयार हैं परंतु बारिश न होने के कारण सुखाड़ जैसे हालात हैं। जिला कृषि पदाधिकारी रणबीर ङ्क्षसह ने बताया कि जुलाई माह में बारिश नहीं हुई है। सामान्य से भी कम वर्षापात होने के कारण ङ्क्षचता की लकीरें खींच गई है। बताया कि 24 जुलाई तक कम से कम 323.4 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी परंतु मात्र 62.93 प्रतिशत बारिश हुई है। नहरी इलाके में तो कुछ रोपनी हो रही है परंतु जिस प्रखंड में पानी नहीं है वहां के किसान बेचैन हैं। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर धान रोपनी कैसे करें। जब तक बारिश नहीं होगी, धान रोपनी कार्य में तेजी नहीं आएगी। डीएओ ने बताया कि मैंने ङ्क्षसचाई विभाग के अधिकारियों से बात की है। उनसे आग्रह किया है तांतिल प्रणाली के तहत नहरों में पानी सप्लाई करें। तांतिल व्यवस्था का मतलब एक नहर को बंद कर दूसरे नहर में पानी छोडऩा है। ङ्क्षसचाई विभाग के अधिकारी इस व्यवस्था के तहत नहरों में पानी की सप्लाई करते हैं। डीएओ ने बताया कि बारिश न होने का असर वैसे तो सभी प्रखंडों में पड़ा है परंतु मदनपुर, देव, रफीगंज, गोह एवं हसपुरा में स्थिति भयावह है। जो किसान खेतों में धान रोपनी किए हैं वे भी परेशान हैं जो नहीं किए हैं वे बेचैन हैं। वैसे मौसम विभाग का अनुमान है कि 26 जुलाई से झमाझम बारिश होगी। 26 से 30 जुलाई तक बारिश के आसार हैं। वैसे अभी तक की स्थिति से जिले में सुखाड़ का खतरा नहर आ रहा है।

 

Edited By: Sumita Jaiswal