जागरण संवाददाता, गया। गया जंक्शन से सटे रेलवे लोको कॉलोनी में बीते हफ्ते जो अतिक्रमण हटाओ अभियान चला उसके बाद अब सन्नाटा है। विरानगी है। जिन गरीब परिवारों का घर-आशियाना इस अभियान में ध्वस्त हो गया उनके चेहरे पर अब मायूसी है। नए ठिकाना की तलाश में जुटे हैं। इस बीच उन ध्वस्त हुए मलवों से अपनी जरूरत के सामान खोजकर ले जा रहे हैं। मेहनत से एक-एक ईंट व मिट्टी की दिवाल खड़ी की थी। करकट, बांस-बल्लों से झोपड़ियां तानी थी। अब इस जुगत में हैं उन्हें सहेजकर नए जगह पर दुकान अथवा सिर छिपाने के लिए झोपड़ी बनाई जाए। सालों तक गरीबी की जिंदगी में रहे कई परिवार कहते हैं कि रेलवे की जमीन पर ही रह रहे थे। सरकार उन गरीबों के बारे में भी सोचे। आखिर अब वह कहां रहेंगे?

छह दिनों तक चला था अभियान, ध्वस्त हुए थे सैकड़ों संरचना

रेलवे इंजीनियरिंग विभाग व सुरक्षा बल द्वारा कॉलोनी में 9 से 14 फरवरी तक अभियान चलाया गया था। जंक्शन से सटे लोको,खरखुरा,धनिया बगीचा, हिंदले,माशर्लिग यार्ड कॉलोनियों में पुलिस बल द्वारा दिन भर एक-एक कर अतिक्रमित संरचनाओं को हटाया गया था। अभियान में  150 से अधिक अतिक्रमण हटाया गया था।

अभियान समाप्ति के बाद अब तरह-तरह की हो रही चर्चा

कोलॉनी से अतिक्रमण हटाए जाने के बाद वहां अब आगे क्या कार्रवाई होगी इसे लेकर आम जनों में  तरह -तरह की चर्चा हो रही है। कोई कह रहा कि अब उस जमीन पर सोसायटी बनेगी तो कोई कह रहा जमीन को लीज पर देकर काम किया जाएगा। बहरहाल, रेलवे के अधिकारी बहुत कुछ इस मुद्दे पर नहीं बोल रहे। वैसे सूत्रों की मानें तो सेंट्रल सर्विसेज में तैनात कर्मियों के लिए यहां नए सिरे से कॉलोनी बनाए जाने की चर्चा है।

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