गया । हिदू मान्यताओं के अनुसार पिंडदान मोक्ष प्राप्ति का एक सहज एवं सरल मार्ग है। देश में ऐसे तो कई स्थान हैं, जहां पिंडदान किए जाते हैं। लेकिन गया में फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करने का महत्व ज्यादा है। इसी को लेकर पितृपक्ष में लाखों पिंडदानी अपने पितरों की मोक्ष को लेकर कर्मकांड करते हैं। बुधवार को भीमगया, गौप्रचार एवं गदालोल पिंडवेदियों पर श्रद्धालुओं ने कर्मकांड किया। सुबह से ही इन पिंडवेदियों पर कर्मकांड को लेकर पिंडदानी पहुंचने लगे। सूर्य उदय होते ही गयापाल पुरोहित द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कर्मकांड का कार्य प्रारंभ कर दिया गया। पूरे दिन उक्त पिंडवेदियों पर कर्मकांड होते रहे। सबसे अधिक पिंडदानियों की संख्या गौप्रचार वेदी में देखी गई। पिंडदानी अपने पितरों की मोक्ष का कामना को लेकर कर्मकांड कर रहे थे। गौप्रचार वेदी पर गाय के पैरों के सैकड़ों निशान आज भी स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं। कर्मकांड करने के बाद पिंडदानी गौ के पैरों के निशान पर पिंड अर्पित कर रहे थे। पूरी तरह से पिंडवेदी वैदिक मंत्रोच्चारण से गूंज रहा था। पिंडवेदी पर सबसे अधिक भीड़ 15 और 17 दिनों के कर्मकांड करने वालों की थी।

ओडिशा से आए भूपेंद्र बसु ने कहा कि गयाधाम पहली बार पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए आए हैं। 17 दिनों का कर्मकांड कर रहा हूं। गौप्रचार वेदी पर गाय के पैरों के निशान देखकर हैरान हूं। यहां कर्मकांड करने से मन की शांति मिल रही है। मान्यता है कि गौप्रचार वेदी का महत्व काफी है। राजा युधिष्ठिर द्वारा महायज्ञ इस स्थान पर किया गया था। लाखों गाय दान किए गए थे। वेदी के पास जो गाय के पैरों का चिह्न हैं उन पर कर्मकांड करने से पितरों को गौ लोक की प्राप्ति होती है। वहीं, भगवान विष्णु ने हेती नामक दानव को वध कर अपनी गदा गदालोल तालाब में धोए थे। इस स्थान पर पिंडदान करने पितरों को अक्षयलोक की प्राप्ति होती है। गौप्रचार पिंडवदी मां मंगलागौरी मंदिर के पास स्थित है। पिंडदानी एक-एक कर पिंडवेदी तक पहुंच रहे थे। इसके कारण लंबी कतार लगी थी। पिंडदानी अपने साथ कर्मकांड की सामग्री लेकर कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। वृद्ध पिंडदानियों को स्थानीय लोग सहारा देकर वेदी तक पहुंचा रहे थे और कर्मकांड की विधि संपन्न कर रहे थे।

Posted By: Jagran

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