बोधगया : मगध विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त करना और भगवान का साक्षात दर्शन करना एक है। हालांकि डिग्री को लेकर विवि प्रशासन हमेशा से चर्चा में रहा है। यहां जितने भी कुलपति आए, सभी ने डिग्री फॉरमेट को लेकर अपना-अपना प्रयोग किया। इसका खामियाजा यहां से पास आउट हुए छात्रों को भुगतना पड़ा है। वर्तमान में भी ऐसा ही एक वाक्या हुआ और विवि प्रशासन फिर से डिग्री को लेकर चर्चा में है। नालंदा कॉलेज बिहारशरीफ से बीएससी की परीक्षा 2013 में पास करने वाली निकिता सिन्हा को परीक्षा उत्तीर्ण करने के सात वर्ष बाद भी विवि प्रशासन द्वारा डिग्री मुहैया नहीं कराया गया। जिसके कारण उसे बीपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद भी नौकरी से हाथ गंवाना पड़ा। हालांकि शुक्रवार को उसे विवि द्वारा डिग्री मुहैया कराया गया और विवि प्रशासन द्वारा बीपीएससी के सचिव को एक पत्र भी इसके संबंध में निर्गत किया गया। लेकिन अब तो निकिता को नौकरी प्राप्त करने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी और इंतजार भी करना पड़ेगा।

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डिग्री व्यवस्था में नहीं आया बदलाव

मगध विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त करने की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आया है। जितने भी कुलपति यहां आए, सभी ने अपने-अपने हिसाब से डिग्री व्यवस्था में बदलाव किए। कारण चाहे जो भी रहा हो। वर्तमान में भी कुलपति प्रो. राजेन्द्र प्रसाद पारदर्शिता को लेकर डिग्री फारमेट में बदलाव किए। लेकिन निर्गत किए जाने की प्रक्रिया सरल नहीं हो सकी। जबकि छात्रों से परीक्षा फार्म भरने समय ही डिग्री के लिए विवि प्रशासन द्वारा निर्धारित शुल्क वसूल लिया जाता है। इसके पीछे तर्क यह है कि डिग्री को छात्रों के संबंधित कॉलेजों में भेजा जाएगा। लेकिन यह व्यवस्था सुचारू नहीं हो सका है। आज भी छात्रों को डिग्री प्राप्त करने के लिए विवि मुख्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है और महीनों या यों कहें की सालों इंतजार करना पड़ता है। -------

छात्रों की है मांग

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभाग संयोजक अमन कुमार मिश्रा ने कहा कि आज मगध विश्वविद्यालय के छात्रों को समय पर डिग्री नहीं मिलना निदनीय है। डिग्री का फारमेट छपवाने के लिए कुलपति स्तर से बाहर के निजी एजेंसी का चयन किया जाता है। जो गलत है। निकिता दस माह पहले अपने बीपीएससी के कॉल लेटर के साथ डिग्री के लिए आवेदन दी थी। उसे भी समय पर डिग्री नहीं मिला। ऐसे मामले आए दिन यहां होते हैं।

मगध विश्वविद्यालय के छात्र प्रतिनिधि कुणाल किशोर कहते हैं कि डिग्री बनाने के लिए 30 दिन का समय निर्धारण किया गया है। लेकिन कई महीने, कई साल बीत जाने के बावजूद डिग्री निर्गत नही किया जाता है। जिसके कारण अनावश्यक छात्र परेशान होते हैं। डिग्री लखनऊ या दिल्ली में छपने की बात कही जाती है। जो गलत है। कुलपति भी डिग्री निर्गत करने की व्यवस्था को सरल बनाने के प्रति सजग नहीं हैं।

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कहते हैं परीक्षा नियंत्रक

विवि परीक्षा नियंत्रक डॉ. भृगुनाथ कहते हैं कि छात्रा को डिग्री मुहैया करा दिया गया है। कोविड 19 के कारण लॉकडाउन में विवि बंद था। निकिता के डिग्री के संबंध में बिहार लोक सेवा आयोग को भी सूचना मेल के माध्यम से दी गयी थी।

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