5-10 मिनट का रास्ता हुआ 10-15 KM का, गया-कोडरमा रेलखंड पर घेराबंदी से सैकड़ों गांव प्रभावित
रेलवे द्वारा गया-कोडरमा रेलखंड पर की गई घेराबंदी से आसपास के गांवों का सीधा संपर्क टूट गया है, जिससे ग्रामीणों ...और पढ़ें

जान जोखिम में डालकर पटरी पार करते ग्रामीण। जागरण
HighLights
रेलवे घेराबंदी से गांवों का सीधा संपर्क टूटा, दूरी बढ़ी।
किसानों, छात्रों और मरीजों को आवागमन में हो रही दिक्कत।
मुखिया ने रेल मंत्री को वैकल्पिक मार्ग हेतु पत्र भेजा।
संवाद सूत्र, फतेहपुर (गया)। गया-कोडरमा रेलखंड पर सुरक्षा के लिए की जा रही रेल लाइन की घेराबंदी अब आसपास के गांवों के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।
सुरक्षा घेरे से कई गांवों का वर्षों पुराना सीधा संपर्क टूट गया है। पहले जिस दूरी को ग्रामीण पांच से 10 मिनट में पैदल या बाइक से तय कर लेते थे, अब उसके लिए 10 से 15 किलोमीटर तक का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
सबसे अधिक परेशानी किसानों को हो रही है, जिनकी जमीन रेलवे ट्रैक के दूसरी तरफ है। खेत तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगने से रखवाली, सिंचाई और फसल की देखभाल प्रभावित हो रही है।
वैकल्पिक आवागमन नहीं मिलने से किसान लोग और बेहाल
घेराबंदी का काम अंतिम चरण में है। पहले कुछ स्थानों पर लोगों के आने-जाने के लिए रास्ते छोड़े गए थे, लेकिन अब उन रास्तों को भी बंद कर दिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके साथ सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया जाना भी जरूरी है। अंडरपास या ओवरब्रिज की व्यवस्था नहीं होने से रोजमर्रा का आवागमन मुश्किल हो गया है।
इन गांवों पर सबसे अधिक असर
मानपुर, बंधुआ, टनकुप्पा, बंशीनाला, पहाड़पुर और गुरपा क्षेत्र के दोनों छोर पर बसे सैकड़ों गांवों के लोग प्रभावित हो रहे हैं।
खेती, बाजार, विद्यालय, अस्पताल और प्रखंड मुख्यालय से जुड़े कार्यों के लिए दोनों तरफ के लोगों को नियमित रूप से रेल पटरी पार करनी पड़ती है।
क्षेत्र में सुरक्षित रेल क्रासिंग की कमी है। अब घेराबंदी पूरी होने के बाद छोटी दूरी तय करने के लिए भी ग्रामीणों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ेगा।
हादसों ने बढ़ाई चिंता
मानपुर से गुरपा के बीच रेल पटरी पार करने के दौरान कई हादसे हो चुके हैं। रन ओवर और बाइक के ट्रेन से टकराने जैसी घटनाएं क्षेत्र में चिंता बढ़ाती रही हैं।
बंशीनाला से पहाड़पुर के बीच भी रेल पटरी पार करने के दौरान कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। अगस्त 2026 में खैरा गांव के पास 22 वर्षीय युवक की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
जुलाई में तेलबीघा के समीप नई दिल्ली-हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस से एक बाइक टकरा गई थी। वर्ष 2025 में पहाड़पुर के पास एक युवक शार्टकट के प्रयास में खड़ी मालगाड़ी के नीचे से निकलकर ट्रैक पार कर रहा था। इसी दौरान ट्रेन चल पड़ी तो उसने पटरी पर लेटकर अपनी जान बचाई।
बंशीनाला के पास ट्रेन से उतरकर घर जा रहे पति-पत्नी की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। अगस्त में तेलबीघा क्रासिंग के पास तीन दिनों के भीतर तीन लोगों की ट्रेन से कटकर मौत हुई थी।
सुरक्षित रेल क्रासिंग के अभाव में हुई इन घटनाओं ने क्षेत्रवासियों को झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षित रास्ता नहीं मिलने पर लोग मजबूरी में जोखिम उठाकर रेल पटरी पार करते हैं।
ग्रामीणों ने कहा- खेती का काम हो रहा प्रभावित
ढिबर पंचायत के महावीर यादव, लालू यादव, पप्पू कुमार और रंजीत यादव ने बताया कि खेत रेलवे ट्रैक के दूसरी ओर होने के कारण कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है।
सिंचाई या फसल देखने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि घेराबंदी से पहले अंडरपास या अन्य सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने में भी अतिरिक्त दूरी परेशानी बढ़ा सकती है।
रेल मंत्री को भेजा पत्र
ढिबर पंचायत की मुखिया रंजू देवी ने बताया कि ग्रामीणों की समस्या को लेकर रेल मंत्री को पत्र भेजकर वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि रेलवे की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके साथ प्रभावित गांवों के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। समस्या का समाधान नहीं होने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
