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गया के केसपा में जमीन-जमीन पर इतिहास के निशान, 1200 साल पुरानी धरोहरें खुले आसमान के नीचे; कब जागेगा संरक्षण विभाग?

Published: Sun, 25 Oct 2026 12:06 PM (IST)

बिहार के गया जिले का केसपा गांव सदियों पुराना इतिहास समेटे हुए है, जहां मां तारा मंदिर, बुद्ध प्रतिमाएं और ...और पढ़ें

खुले आसमान के नीचे बुद्ध की प्रतिमा

खुले आसमान के नीचे बुद्ध की प्रतिमा

HighLights

  1. केसपा गांव में सदियों पुरानी ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं।

  2. मां तारा मंदिर, बुद्ध प्रतिमाएं खुले आसमान के नीचे उपेक्षित।

  3. ग्रामीणों ने संग्रहालय और पर्यटन विकास की मांग की।

संवाद सहयोगी, टिकारी(गयाजी)।बिहार के गया जिले के टिकारी प्रखंड का केसपा गांव अपने भीतर सदियों का इतिहास समेटे हुए है। यहां मां तारा देवी का प्राचीन मंदिर, भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा, दुर्लभ विष्णु प्रतिमा और बिखरी पड़ी प्राचीन मूर्तियां अतीत की समृद्ध विरासत की कहानी कहती हैं।

इतिहास के जानकारों के अनुसार, यहां बौद्ध, गुप्त, प्री-पाल और पाल काल से जुड़े पुरातात्त्विक अवशेष मिलने की संभावना है। इसके बावजूद कई ऐतिहासिक धरोहरें आज भी खुले आसमान के नीचे उपेक्षित पड़ी हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि ऐतिहासिक महत्त्व से समृद्ध केसपा को व्यवस्थित पर्यटन स्थल और विरासत केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल कब होगी।

खुले आसमान के नीचे बुद्ध की प्रतिमा, बिखरी हैं प्राचीन मूर्तियां

केसपा गांव के बीचोंबीच काले पत्थर से बनी करीब आठ फीट ऊंची भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा खुले आसमान के नीचे स्थित है। इसके आसपास गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां भी बिखरी हुई हैं।

गांव की मुख्य गली में पत्थर से बना विशाल कमल का फूल भी मौजूद है, जो इस क्षेत्र की प्राचीन कलात्मक परंपरा की ओर ध्यान खींचता है।

स्थानीय लोग बुद्ध की प्रतिमा को भगवान विष्णु का अवतार मानकर पूजा करते हैं। हालांकि, इन मूर्तियों की ऐतिहासिक पहचान, काल निर्धारण और पुरातात्त्विक महत्त्व को स्पष्ट करने के लिए वैज्ञानिक सर्वेक्षण जरूरी है।

ग्रामीणों की मांग है कि इन धरोहरों को सुरक्षित स्थान पर संरक्षित किया जाए, ताकि समय और मौसम के प्रभाव से इन्हें नुकसान न पहुंचे।

छह फीट ऊंची मां तारा की प्रतिमा, सदियों से आस्था का केंद्र

केसपा स्थित उत्तराभिमुख मां तारा देवी का मंदिर गांव की प्रमुख धार्मिक पहचान है। मंदिर में काले पत्थर से निर्मित करीब छह फीट ऊंची मां तारा की प्रतिमा स्थापित है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, महर्षि कश्यप ने यहां प्रतिमा की स्थापना की थी। मंदिर की ऐतिहासिकता का उल्लेख पुराने यात्रियों और पुरातत्त्ववेत्ताओं के विवरणों में भी मिलता है।

वर्ष 1812 में फ्रांसिस बुकनन, 1872 में जोसेफ डेविड बेगलर और 1902 में थियोडोर ब्लॉख ने इस क्षेत्र का भ्रमण किया था। इन यात्राओं के विवरण केसपा की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को सामने लाते हैं। गांव में मां तारा मंदिर के अलावा सूर्य मंदिर, शिवालय और राम-जानकी ठाकुरबाड़ी भी धार्मिक विरासत का हिस्सा हैं।

1200 साल पुरानी मूर्तियों और बौद्ध मठ के अवशेष मिलने की संभावना

इतिहास और पुरातात्त्विक विषयों के जानकार डॉ. शत्रुघ्न दांगी के अनुसार, केसपा का संबंध बौद्ध, गुप्त, प्री-पाल और पाल काल के इतिहास से है।

उनके मुताबिक, गांव में बिखरी मूर्तियां और स्थापत्य अवशेष इस क्षेत्र की प्राचीनता के संकेत देते हैं। यहां लगभग 1200 साल पुरानी मूर्तियों और एक बड़े बौद्ध मठ के अवशेष मिलने की संभावना भी उन्होंने जताई है।

पुरातत्त्ववेत्ता ए. एम. बेगलर ने 1872-73 में इस स्थल की जानकारी दर्ज की थी। इसके बाद थियोडोर ब्लॉख और राहुल सांकृत्यायन ने भी अलग-अलग समय पर इस क्षेत्र का दौरा किया।

डी. आर. पाटिल की पुस्तक 'एंटीक्वेरियन रिमेंस ऑफ बिहार' में भी केसपा का उल्लेख होने की बात कही जाती है। इन ऐतिहासिक संदर्भों को देखते हुए व्यवस्थित पुरातात्त्विक सर्वेक्षण से गांव की विरासत के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

चारों दिशाओं में धार्मिक विरासत, हिंदू-बौद्ध परंपराओं का संगम

केसपा की खासियत यहां मौजूद अलग-अलग धार्मिक स्थलों का भौगोलिक विस्तार भी है। गांव के पूर्व में गरुड़ पर सवार भगवान विष्णु की दुर्लभ प्रतिमा, पश्चिम में राम-जानकी ठाकुरबाड़ी और शिवालय, उत्तर में सूर्य मंदिर तथा दक्षिण में मां तारा देवी का मंदिर स्थित है। सूर्य मंदिर में भगवान बुद्ध के पदचिह्न होने की स्थानीय मान्यता भी प्रचलित है।

स्थानीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के बीच यह गांव हिंदू और बौद्ध विरासत के मेल की अनूठी पहचान रखता है। फरवरी 1992 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा मां तारा मंदिर में पूजा-अर्चना किए जाने का प्रसंग भी गांव से जुड़ा बताया जाता है।

इन स्थलों को एक व्यवस्थित विरासत मार्ग के रूप में विकसित किया जाए तो धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।

सांसद आदर्श ग्राम बना, लेकिन विरासत संरक्षण अब भी चुनौती

वर्ष 2014 में तत्कालीन सांसद सुशील कुमार सिंह ने केसपा को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया था। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए अपेक्षित काम नहीं हो सका। पिछले दो वर्षों से यहां पर्यटन विभाग की ओर से मां तारा देवी महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।

वहीं, ग्रामीण हिमांशु शेखर और उनके सहयोगियों की पहल पर पिछले पांच वर्षों से बुद्ध जयंती समारोह भी आयोजित किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव की ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप बौद्ध महोत्सव और अन्य सांस्कृतिक आयोजनों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, केवल आयोजन से विरासत सुरक्षित नहीं होगी, इसके लिए स्थायी संरक्षण व्यवस्था भी जरूरी है।

संग्रहालय बने, मूर्तियां सुरक्षित हों, पर्यटन से मिले नई पहचान

ग्रामीणों की मांग है कि केसपा में एक संग्रहालय स्थापित किया जाए, जहां बिखरी हुई प्राचीन मूर्तियों और पुरातात्त्विक अवशेषों को सुरक्षित रखा जा सके।

इसके साथ ही पुरातात्त्विक सर्वेक्षण, सूचना पट्ट, बेहतर संपर्क मार्ग, साफ-सफाई और प्रशिक्षित स्थानीय गाइडों की व्यवस्था की जरूरत बताई जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार, फ्रांस, श्रीलंका और तिब्बत सहित विभिन्न देशों से पर्यटक यहां आते हैं। बेहतर सुविधाएं विकसित होने पर केसपा को बौद्ध पर्यटन परिपथ से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

इसके लिए पर्यटन विभाग, पुरातत्त्व विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय समुदाय को समन्वित पहल करनी होगी। यदि समय रहते धरोहरों की पहचान, दस्तावेजीकरण और संरक्षण नहीं हुआ, तो ऐतिहासिक महत्त्व रखने वाले कई अवशेष लगातार क्षरण के खतरे में रह सकते हैं।