नौकरी छोड़िए, रोजगार देने वाला बनिए! गया के स्नातक पंकज की मशरूम खेती से बदल गई जिंदगी
गया के स्नातक पंकज कुमार ने नौकरी की तलाश छोड़ स्वरोजगार के रूप में मशरूम उत्पादन शुरू किया। यह उद्यम ...और पढ़ें

नौकरी की तलाश छोड़ शुरू किया अपना काम
HighLights
स्नातक पंकज ने नौकरी छोड़ शुरू की मशरूम की खेती।
प्रतिदिन 20 किलो उत्पादन, मासिक आय 50 हजार से अधिक।
चार अन्य युवाओं को भी मिला रोजगार, बनी प्रेरणा।
संदीप साहनी, मानपुर(गयाजी)। स्नातक तक पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय बुधगेरे बाजार के समीप रहने वाले युवा पंकज कुमार ने स्वरोजगार की राह चुनी। वर्ष 2024 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने घर पर ही मशरूम उत्पादन शुरू किया। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह काम अब उनके लिए अच्छी आमदनी का जरिया बन गया है।
नौकरी की तलाश छोड़ शुरू किया अपना काम
पंकज ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने कम पैमाने पर मशरूम उत्पादन किया। बाजार में मांग और उत्पादन बेहतर होने के बाद धीरे-धीरे काम का विस्तार किया।
वर्तमान में करीब 500 पैकेट मशरूम लगाए गए हैं। मचान बनाकर पैकेटों को व्यवस्थित तरीके से रखा गया है, जिससे कम जगह में अधिक उत्पादन किया जा सके।
रोज 20 किलो उत्पादन, 50 हजार से अधिक आमदनी
पंकज के अनुसार वर्तमान में प्रतिदिन करीब 20 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन हो रहा है। इससे महीने में 50 हजार रुपये से अधिक की आमदनी हो जाती है।
उनका कहना है कि मशरूम उत्पादन में अपेक्षाकृत कम लागत आती है और बाजार में मांग अच्छी रहने से मुनाफे की संभावना भी बनी रहती है। मेहनत और नियमित देखभाल से यह काम अब आय का बेहतर साधन बन गया है।
खुद कमाया, चार युवाओं को भी काम दिया
उत्पादन बढ़ने के साथ पंकज के काम का दायरा भी बढ़ा। मशरूम के पैकेट तैयार करने, उनकी देखभाल, उत्पादन और मशरूम निकालने जैसे कार्यों के लिए उन्होंने स्थानीय स्तर पर चार लोगों को रोजगार दिया है।
पंकज का कहना है कि अपने लिए रोजगार खड़ा करने के साथ दूसरों को काम देने का अवसर मिलना उनके लिए संतोष की बात है।
परिवार की आर्थिक स्थिति भी हुई मजबूत
मशरूम से होने वाली आमदनी से पंकज के परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र के युवा कृषि आधारित व्यवसाय को अपनाकर अपने गांव और क्षेत्र में ही रोजगार का अवसर तैयार कर सकते हैं।
इसके लिए बड़े स्तर पर निवेश की अनिवार्यता नहीं है। छोटे स्तर से शुरुआत कर बाजार की मांग के अनुसार कारोबार बढ़ाया जा सकता है।
रामराज के अनुभव से मिली खेती में मदद
मशरूम उत्पादन में सहयोग कर रहे रामराज पहले शंकर बिगहा में इस काम से जुड़े थे। वहां मिले अनुभव का लाभ अब बुधगेरे बाजार के समीप मशरूम उत्पादन में मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में करीब आधा कट्ठा जमीन में मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है। इसके लिए दो मचान बनाए गए हैं, जहां उत्पादन बेहतर हो रहा है।
सही तापमान और नमी से बेहतर पैदावार
रामराज के अनुसार मशरूम उत्पादन में तापमान और नमी का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। नियमित देखभाल के साथ सही वातावरण बनाए रखने पर अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है।
उनका अनुभव बताता है कि तकनीकी जानकारी और मेहनत के साथ मशरूम की खेती को छोटे स्तर पर भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
युवाओं के लिए स्वरोजगार की मिसाल
पंकज कुमार का प्रयास क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है। स्नातक तक पढ़ाई करने के बाद नौकरी की सीमित संभावनाओं में उलझने के बजाय उन्होंने कृषि आधारित स्वरोजगार को चुना।
आज यही काम उनकी आय का साधन बनने के साथ चार अन्य लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी बन गया है। पंकज युवाओं से नौकरी की तलाश में वर्षों तक भटकने के बजाय अपनी रुचि और क्षेत्र की मांग के अनुसार स्वरोजगार शुरू करने की अपील करते हैं।
