गया : बीते चार दिनों से मौसम पूरी तरह से बरसात का आ गया है। गुरुवार सुबह से ही जिला मुख्यालय समेत प्रखंड क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश हो रही है। आसमान पूरी तरह से काले बादलों से ढका हुआ है। कभी मध्यम तो कभी तेज बारिश होती रही। मौसम विज्ञानी डॉ. जाकिर हुसैन ने कहा कि अभी अगले 72 घंटे जिले में मानसून पूरी तरह से सक्रिय रहेगा। बारिश का दौर अभी जारी रहेगा। बारिश की वजह से एक ओर जहां शहरी क्षेत्र में जगह-जगह जलजमाव देखने को मिल रहा है। तो वहीं उबड़-खाबड़ सड़कों पर पानी व कीचड़ जम जाने से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।

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गांव-कस्बों के आहर-पोखर में दिखने लगा बरसात का पानी

-गांव-कस्बों में बारिश से खेतीबारी को फायदा होता दिख रहा है। कल तक जो आहर-पोखर, पईन सूखे थे अब वहां बरसात का पानी नजर आ रहा है। किसान इससे काफी खुश हैं। अनेक जगहों पर किसानों ने धान की खेती की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि अभी जेठ का महीना है। इस समय ज्यादातर किसान अपने खेतों में धान का बिचड़ा गिराते हैं। 21 दिनों में जब बिचड़ा पूरी तरह से तैयार हो जाता है तो उसकी रोपनी की जाती है।

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अब तक 31 सौ क्विटल बीज का हुआ वितरण, सबौर श्री 300 क्विटल तक बंटा

-कृषि विभाग के अनुसार अब तक जिले में 50 फीसद बीज बंटे हैं। 31 सौ क्विटल बीज का वितरण हुआ है। डीएओ ने बताया कि इस बार किसानों को सबौर श्री का बीज भी दिया गया है। जो जिले के किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। यह प्रभेद 140-150 दिन का है। उपज अच्छी देता है। इसके अलावा सहभागी, राजेंद्र श्वेता बीज भी किसानों की पसंद में है। स्टेशन रोड, गुरुद्वारा मोड़ के धान बीज विक्रेता संदीप सिंह उर्फ सन्नी ने बताया कि इस बार अच्छी बारिश से से धान की बिक्री ठीकठाक हो रही है। अब तक 200 से अधिक धान के पैकेट की बिक्री हुई है। बोधगया, डोभी, मानपुर, नगर प्रखंड के किसानों के बीच धान के बीज उपलब्ध कराए गए हैं।

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धान की खेती के लिए इस बार अनुकूल दिख रहा मौसम: डीएओ

-जिला कृषि पदाधिकारी सुदामा महतो इस बार के मानसून को धान की खेती के लिए अनुकूल बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी जो बारिश हो रही है इससे बिचड़ा को फायदा हो रहा है। अभी तक जिले में 18 फीसद बिचड़ा लग चुका है। बिचड़ा का विकास अच्छे से होगा। 21 दिन का बिचड़ा रोपनी के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिले में जुलाई के पहले हफ्ते से रोपनी शुरू हो जाएगी।

Edited By: Jagran