यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 24, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कर्मियों की कमी से जन बिन मछली की तरह छटपटा रहा मत्स्य विभाग, औरंगाबाद में जुआरियों ने यहां बनाया अड्डा
दैनिक जागरण ने मत्सय कार्यालय की ऑन द स्पॉट रिपोर्टिंग की। इसमें कार्यालय के कई चौंकानेवाले तथ्य सामने आए। रिपोर्टर ...और पढ़ें

औरंगाबाद, जागरण संवाददाता। दैनिक जागरण ने मत्सय कार्यालय की ऑन द स्पॉट रिपोर्टिंग की। इसमें कार्यालय के कई चौंकानेवाले तथ्य सामने आए। रिपोर्टर ने पाया कि कार्यालय के बाहर लगी भीड़ थी मगर अंदर अधिकारी गायब थे। बगैर पानी मछली जिस तरह छटपटाती है, उसी तरह इन दिनों मत्स्य विभाग कर्मियों ी कमी से छटपटा रही है। यहां पता चला कि शाम से जुआरियों का जमघट लगता है।
समय : सुबह के 10.35 बजे, दिन : सोमवार, स्थान : मत्स्य विभाग का कार्यालय। कार्यालय के बाहर भीड़ लगी है परंतु अंदर अधिकारी गायब हैं। संविदा पर बहाल मत्स्य विकास पदाधिकारी अजय कुमार चौधरी, लिपिक रवि कुमार एवं चार चतुर्थवर्गीय कर्मचारी उपस्थित मिले। जिला मत्स्य पदाधिकारी सत्येंद्र राम का कार्यालय बंद था। ताला लटका था। पूछने पर लिपिक रवि ने बताया कि साहब साप्ताहिक मीङ्क्षटग में डीएम साहब के यहां गए हैं। रफीगंज एवं कुटुंबा प्रखंड के तालाबों का नीलामी होनी थी जिस कारण बाहर में भीड़ लगी थी। तालाब लेने के लिए दोनों प्रखंडों से सैंकड़ों की संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे। सभी जिला मत्स्य पदाधिकारी के आने का इंतजार कर रहे थे। 12 बजे तक जिला मत्स्य पदाधिकारी कार्यालय नहीं पहुंचे थे। बाहर में यह चर्चा हो रही थी जिला मत्स्य पदाधिकारी कार्यालय से हमेशा गायब रहते हैं। इस विभाग में काम कराना मुश्किल है। अधिकारियों के न रहने के कारण यह विभाग मृतप्राय हो गया है। रफीगंज के भेटनिया गांव से पहुंचे रंजन साहनी, रफीगंज प्रखंड मुख्यालय निवासी सुनील चौधरी, राजा बिगहा के प्रदीप कुमार, बलिराम चौधरी एवं पचरिया गांव निवासी उमेश चौधरी ने बताया कि हमलोग सुबह नौ बजे से आए हैं। 12 बज गया है परंतु अभी तक साहब नहीं हैं। उनके इंतजार में लगता है शाम हो जाएगा।
कर्मियों की कमी से लोगों को परेशान
बगैर पानी मछली जिस तरह छटपटाती है, उसी तरह इन दिनों मत्स्य विभाग छटपटा रही है। आलम यह है कि विभाग में न तो पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही संसाधन। ऐसे में राज्य एवं केंद्र की योजनाओं का संचालन कर उसे धरातल पर उतारना विभाग के लिए बडी चुनौती है। विभाग के कर्मचारियों की कमी से मत्स्य पालन को लेकर उत्पादन ही नहीं बल्कि विपणन पर खासा प्रभाव पड़ा है। विभाग में मत्स्य विकास पदाधिकारी के छह पद स्वीकृत हैं जिसमे एक भी कार्यरत नहीं है। संविदा पर बहाल कर्मियों के द्वारा कार्य कराया जा रहा है। चतुर्थवर्गीय कर्मियों का पांच पद स्वीकृत है जिसमें चार कार्यरत हैं। इसके अलावा कई अन्य पद हैं जिनका पदस्थापन नहीं है।
तीन जिले के प्रभार में कनीय अभियंता
इस विभाग के कनीय अभियंता मनोज कुमार ङ्क्षसह सप्ताह में दो दिन कार्यालय आते हैं। लिपिक रवि ने बताया कि वे तीन जिला औरंगाबाद, अरवल एवं जहानाबाद के प्रभार में हैं। तीनों जिले में अकेले कैसे कार्य करते होंगे सोचा जा सकता है। सोमवार को उनका ड्यूटी अरवल जिला में है। औरंगाबाद में उनका डयूटी बुधवार एवं गुरुवार को है। दो दिन ही उनसे मुलाकात हो सकती है। अब सोचा जा सकता है कि एक कनीय अभियंता को तीन जिलों का प्रभार दे दिया गया है तो कार्य किस तरह होगा।
दो प्रखंड के 95 तालाब का नीलामी
मत्स्य विकास पदाधिकारी ने बताया कि रफीगंज के 94 एवं कुटुंबा के एक तालाब का नीलामी होनी है। निलामी में मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सदस्य ही भाग ले सकते हैं। यह समिति मछुआरों की है। जिला मत्स्य पदाधिकारी के नेतृत्व में नीलामी होगी। साहब के आने से पहले कागजी जांच पूरी कर ली गई है।
20 तालाबों की हुई है खुदाई
मत्स्य विकास पदाधिकारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिले में करीब 20 तालाबों की खुदाई हुई है। तालाब को लेकर लाभुक रुचि नहीं देखा रहे हैं। जो इच्छुक हैं वे कागजात पूरा नहीं कर पा रहे हैं। अधिक तालाबों की खुदाई न होने का इसके अलावा कई अन्य कारण है।
जुआरियों का अड्डा बना मत्स्य विभाग
मत्स्य विभाग जुआरियों एवं शराबियों का अड्डा बन गया है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि यहां शाम में छह बजे से शराबी बैठकर शराब पीना शुरू कर देते हैं। देर रात तक शोरगुल करते हैं। जुआ खेलते रहते हैं। कई बार इस संबंध में पुलिस को सूचना दी गई परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुआ। सूचना देने के बाद पुलिस आती हैं और बिना जांच के लिए चली जाती है।
कहते हैं मत्स्य पदाधिकारी
जिला मत्स्य पदाधिकारी सत्येंद्र राम ने कार्यालय में उपस्थित नहीं रहने के सवाल पर कहा कि समाहरणालय में सोमवार को मीङ्क्षटग रहती हैं। मैं वहीं चला गया था। कार्यालय में कर्मियों की कमी को लेकर डीएम को पत्र लिखा है। अपने विभाग के उच्च अधिकारियों को सूचित किया हूं। कर्मियों की कमी के कारण कार्य करने में परेशानी होती है।
