जागरण संवाददाता, बोधगया : भाद्रपद माह के अमावस्या तिथि को देश के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने गया के विष्णुपद में अपने पितरों का पिंडदान किया। इसके बाद उन्होंने अंत: सलिला फल्गु नदी में तर्पण कर अपने पितरों के मोक्ष की कामना की। इस दौरान उनकी पत्नी भी साथ थीं।

दो दिवसीय बिहार दौरे पर शनिवार को डोभाल पटना पहुंचे थे। राजगीर-नालंदा परिभ्रमण कर देर रात गया पहुंचे। यहां उन्होंने ओटीए में रात्रि को विश्राम किया। रविवार सुबह विष्णुपद में पिंडदान व फल्गु में तर्पण के पश्चात बुद्धभूमि को नमन करने पहुंचे। विश्वदाय धरोहर महाबोधि मंदिर के गर्भगृह में उन्होंने भगवान बुद्ध को नमन किया। पूजा अर्चना भंते धर्मेन्द्र ने कराया। उसके बाद उन्होंने पवित्र बोधिवृक्ष की छांव में कुछ पल ध्यान-साधना में व्यतीत किए। रॉयल थाई मंदिर और 80 फीट विशाल बुद्ध प्रतिमा का परिभ्रमण कर गंतव्य के लिए प्रस्थान कर गए। महाबोधि मंदिर पहुंचने पर डोभाल व उनकी पत्‍‌नी की आगवानी बीटीएमसी सचिव एन. दोरजे ने खादा भेंट कर किया। मंदिर परिभ्रमण के पश्चात उन्हें महाबोधि मंदिर की प्रतीकचिह्न व कॉफी टेबल बुक देकर भिक्षु प्रभारी भंते चालिंदा ने सम्मानित किया।

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बौद्ध धर्म सच्चे मानव

रूप का कराता है बोध

बोधगया : भगवान बुद्ध ने क्या शिक्षा दी। इससे महत्वपूर्ण है कि उनकी शिक्षा से दुनिया के लोगों ने क्या सीखा। बौद्ध धर्म सच्चे मानव रूप का बोध कराता है। उक्त बातें सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने महाबोधि मंदिर के अतिथि पंजी में परिभ्रमण के पश्चात अंकित किए। उन्होंने लिखा कि भारत की बहुआयामी धार्मिक व आध्यात्मिक अनुभूति से जुड़कर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। बौद्ध धर्म हमें डर, ईष्र्या, क्रोध और ¨हसा से दूर ले जाता है।

Posted By: Jagran

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