मनीष कुमार, औरंगाबाद। बढ़ते शहरीकरण व बाजारीकरण के बीच गांवों में लगने वाले हाट व बाजार का वजूद समाप्त होता जा रहा है। देव प्रखंड के बेढ़नी पंचायत के खडीहा गांव के पास हर शनिवार एवं मंगलवार को लगने वाले कुटिया बाजार का अस्तित्व समाप्‍त होता जा रहा है। करीब एक सौ वर्ष से कुटिया बाजार लगता आ रहा है। यह  देव से कंचनपुर जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे लगता है। यहां पान का बाजार सजता था। वह भी ऐसा कि दूर-दूर के व्‍यापारी यहां से मगही पान ले जाते थे। मगही पान के अलावा ताजा गुड़ और गुड़ से बनाई जाने वाली मिठाई इस बाजार की पहचान थी।

जब साधन नहीं थे तब दूर-दूर तक की पहचान, आज सबकुछ लेकिन अस्तित्‍व पर खतरा

जब यहां 100 वर्ष पहले बाजार लगना शुरु हुआ था। तब न पक्की सड़क थी न कोई विकास दिखता था। यहां आसपास के गांव एरकी टोले गिधौल, भत्तुबिगहा, खेमचंद बिगहा, तेजुबिगहा, केताकी, खडीहा, योधपुर समेत अन्य गांवों में बड़े पैमाने पर मगही पान की खेती होती थी। तब कृषकों ने अपनी एक कमेटी बनाकर यहां पान बेचने के लिए बाजार लगाना शुरु किया था। यहां का ताजा मगही पान खरीदने औरंगाबाद शहर के अलावा वाराणसी, कोलकाता, रांची, पटना, गया जैसे शहरों से व्यापारी आते थे। जब कृषक यहां पान बेचने लगे और बाजार लगने लगा तब आसपास के गांवों के किसान  ताजी सब्जी, साग, फल आदि बेचने लगे। किसान अपने खेतों से सब्जी और साग सीधे कुटिया बाजार में लेकर आते थे और बेचते थे। जब न आवागमन की सुविधा थी और न संचार माध्‍यम की तब यहां की रौनक चरम पर थी। अब जब सारी सुविधाएं हो गईं तो बाजार के वजूद पर ही खतरा आ गया।

 

सरकार की उपेक्षा के कारण है बदहाली  

खडीहा गांव के किसान पूर्व मुखिया संजय सिंह कहते हैं की सरकार की उपेक्षा से कुटिया बाजार का वजूद समाप्त होता जा रहा है। इस बाजार के प्रति जिला प्रशासन के अलावा प्रखंड व अंचल प्रशासन का ध्यान नहीं है। कभी इस बाजार से मगही पान वाराणसी, गया, पटना, कोलकाता जैसे शहरों में जाती थी। इन शहरों के व्यापारी इस बाजार में हर शनिवार एवं मंगलवार को आते थे और मगही पान खरीदकर ले जाते थे। भत्तुबिगहा गांव के पान किसान सह पूर्व प्रमुख सुरेंद्र चौरसिया कहते हैं की सरकारी उपेक्षा के कारण ऐसा हो रहा है।  इस बाजार में पेयजल, दुकानदारों को बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। अन्य असुविधाएं हैं। बाजार का वजूद मिट न जाए इसके लिए जिला प्रशासन व प्रखंड के अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है।

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