मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

गया : समर्पण से लक्ष्य साधने में मदद मिलती है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए यह जरूरी है। आपके कार्य से ही संस्थान का भी नाम रोशन होता है। आगे बढ़ने के लिए काम के प्रति हमेशा ईमानदार रहें।

ये बातें बुधवार को आइआइएम के दूसरे दीक्षांत समारोह में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन में बतौर मुख्य अतिथि कही। इससे पहले कार्यक्रम के विधिवत शुभारंभ की घोषणा आइआइएम शासी मंडल के अध्यक्ष उदय कोटक ने की। अतिथियों ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना की। निदेशक डॉ. विनिता सहाय ने छात्रों को शपथ दिलाई। अतिथियों ने स्मारिका का विमोचन किया। छात्रों के इस यादगार लम्हे का साक्षी उनके माता-पिता व परिजन बने।

मुख्य अतिथि डॉ. सुब्रमण्यन ने अपने छात्र जीवन व काम के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि डिवोशन व डेडिकेशन ही सफलता का मूलमंत्र है। इस समारोह में आकर मुझे अपना दीक्षांत समारोह याद आ गया। आपकी जगह पर मैं था और मेरी जगह कोई और। उन्होंने समारोह में संस्थान के 2016-18 व 2017-19 के 86 छात्रों को डिग्री प्रदान की। शासी मंडल के अध्यक्ष कोटक ने कहा कि अपनी पसंद की राह चुनें व हमेशा सौ प्रतिशत परिणाम देने की कोशिश करें। इसके अलावा अपने सामाजिक दायित्व को समझते हुए निर्वहन करें।

कार्यक्रम में आइआइएम बोधगया की निदेशक डॉ. विनिता सहाय ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र को अपने कार्यक्षेत्र में एक पहचान के तौर पर स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य न केवल मजबूत विश्लेषणात्मक और निर्णय लेने के कौशल के साथ सामाजिक रूप से उल्लेखनीय मूल्यों और नैतिकता के साथ एक समग्र व्यक्तित्व को विकसित करना है।

मुख्य अतिथि ने शैक्षणिक सत्र 2016-18 के लिए चेयरमैन गोल्ड मेडल सचिन पाडे, डायरेक्टर गोल्ड मेडल मकादीय मिराज व बेस्ट स्टूडेंट अवार्ड धनंजय को प्रदान किया। इसी प्रकार सत्र 2017-19 के लिए चेयरमैन गोल्ड मेडल सौरव अग्रवाल, डायरेक्टर गोल्ड मेडल प्रणव किशोर व बेस्ट स्टूडेंट अवार्ड साईं प्रसाद एसएन को प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ।

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इसी दिन का दो वर्षो से कठिन परिश्रम कर इंतजार कर रहे थे। इस दौरान सबका प्यार मिला। उन्होंने कहा कि लगन है मन में तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।

शास्वत

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बहुत खुश हूं। शांति की भूमि पर रहकर दो वर्ष किए मेहनत का फलाफल मिला है। अब देश व समाज के लिए कुछ करने का मौका मिला है। निश्चय ही तन्मयता से इसमें लगूंगा।

अखिल प्रकाश

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यादगार लम्हा है। इसमें मेरी मां और पिताजी भी साथ हैं। मेहनत का फल मिला है। पहली बार आध्यात्म की भूमि पर आकर शिक्षा ग्रहण करने का मौका मिला। बहुत आशाएं थीं, जो पूरी हुई।

पार्थ मिश्रा

Posted By: Jagran

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