टनकुप्पा, संवाद सूत्र: शिक्षा विभाग की अनदेखी के चलते उत्क्रमित उच्च विद्यालय नावागढ़ बीते छह वर्षों से बिना शिक्षक के संचालित हो रहा है। शिक्षक के अभाव में विद्यालय में बच्चों का नामांकन महज कोरम पूरा करने का जरिया बनकर रह गया है। विद्यालय में शिक्षक की पदस्थापना के लिए विभाग को कई बार पत्र लिखा गया है, लेकिन आज तक शिक्षकों की पदस्थापना नहीं की गई।

मध्य विद्यालय के प्रधानध्यापक ललित कुमार ने बताया कि विद्यालय को 2013 में उत्क्रमित कर उच्च विद्यालय में तब्‍दील किया गया है। लाखों की लागत से बने स्‍कूल भवन की उपयोगिता शून्य है। वर्ष 2016 में विभाग के आदेश पर कक्षा नौ में छात्रों का नामांकन शुरू किया गया था जिसके बाद से ही ए‍डमिशन का यह सिलसिला जारी है। 2021 में कुल 98 छात्रों ने मैट्रिक बोर्ड का फार्म भरा था। वहीं, कक्षा एक से आठ तक 315 बच्चे नामांकित है।

बता दें कि मध्य विद्यालय में प्रधानध्यापक सहित आठ शिक्षक कार्यरत हैं लेकिन उच्च विद्यालय में एक भी शिक्षक नियुक्‍त नहीं है। और तो और उच्च विद्यालय का भवन भी आधा किलोमीटर की दूरी पर बनाया गया है, जिसमें बच्‍चों को आवाजाही में परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय में शिक्षक की नियुक्ति करनी चाहिए। आस-पास में कहीं भी उच्च विद्यालय न होने से बच्‍चों को पढ़ाई के लिए टनकुप्पा जाना पड़ता है। 

मध्य विद्यालय नावगढ़ के प्रभारी प्रधानध्यापक ललित कुमार ने बताया कि मासिक बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारी से शिक्षक नियुक्ति के बारे में पत्र दे चुके है। इच्छुक छात्र को मध्य विद्यालय में शिक्षकों द्वारा शिक्षा दी जाती है। हाई स्कूल का सारा ब्यवस्था मध्य विद्यालय में है।

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