संवाद सूत्र, परैया : प्रखंड में कुल 90 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनकी स्थिति दयनीय है। केंद्र खुलने और बंद होने का निर्धारित समय सीमा का ख्याल नहीं रखा जाता। ग्रामीण केंद्र की व्यवस्था से परेशान हैं, लेकिन करें तो करें क्या। सरकारी तंत्र में शिकायत भी उलझ कर रह जाती है। वहीं, सीडीपीओ का पद भी एक माह से रिक्त है। 90 केंद्र व 31 सृजित केंद्रों की जिम्मेदारी दो पर्यवेक्षिका के जिम्मे है। छह माह से कई केंद्रों के लिए चयनित सेविका व सहायिका का प्रशिक्षण अभी तक नहीं हुआ है, जिसके कारण केंद्र अस्तित्व में नहीं है।

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भवन किराया नियमित

पर पोषाहार नहीं

60 केंद्र अपने निजी भवन में संचालित हैं तो 30 किराये के भवन में। किराये के भवनों में संचालित केंद्रों का किराया नियमित है पर पोषाहार नहीं। पोषाहार के अभाव में बच्चे भी केंद्र से विमुख रहते हैं। सेविका-सहायिका रूटीन ड्यूटी करती है। ऐसे केंद्रों में मंझियावा सामान्य, इगुणी, बगाही उतरी, रामडीह, गढ़ परैया व काष्ठा शामिल है।

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दो वर्षाें से बंद है मझियावा अनुसूचित टोला केंद्र

मंझियावा अनुसूचित टोला केंद्र सेविका के नहीं रहने से दो वर्षो से बंद है। केंद्र संख्या 75 पर नियुक्त सेविका सरिता देवी काम छोड़कर चली गई और सहायिका रूबी देवी को विभाग द्वारा घर बैठे मानदेय का भुगतान किया जा रहा है। आश्चर्य इस बात की है कि इतने दिनों से बंद केंद्र को किसी से टैग कर संचालित नहीं किया जा रहा। इसके कारण अनुसूचित टोला के बच्चे व महिला सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।

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पर्याप्त संसाधन का अभाव

प्रखंड के प्राय: सभी केंद्रों पर पर्याप्त संसाधन का अभाव है। कई केंद्रों पर न तो पेयजल के चापानल है और न ही शौचालय की व्यवस्था। दूसरे घरों से सहायिका पानी लाकर पोषाहार बनाती है। ऐसे केंद्रों में दखिनेर, मंझार, बैगोमन आदि शामिल हैं।

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सीडीपीओ का पद है रिक्त

समेकित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी का पद गत एक वर्ष से प्रतिनियुक्ति के भरोसे चल रहा है। प्रखंड में बेलागंज की सीडीपीओ रश्मि रंजन की आखिरी प्रतिनियुक्ति रही, जिनका पदोन्नति के पश्चात तबादला हो गया। उसके बाद से पद रिक्त है।

Posted By: Jagran