जासं, नवादा। चार लोगों की जान ले चुके जंगली हाथी का अब तक पता नहीं चल सका है। हाथी को पकड़ने के लिए पटना और गया से पहुंची टीम को भी सफलता नहीं मिली है। इस कारण लोगाें में दहशत का माहौल है। सभी अपने घरों में दुबके हुए हैं। हाथी को अंतिम बार नवादा जिले के मेसकौर थाना क्षेत्र के सिमरबीघा में देखा गया। आशंका है कि वह गया जिले में प्रवेश कर गया है।

रात होने के कारण हाथी का नहीं चला पता

वन विभाग के अनुसार हाथी झारखंड से सटे गया जिले के गुरपा के जंगलों से भटककर नवादा आ गया था। रात होने की वजह से वन विभाग की टीम को सफलता नहीं मिल सकी। गुरुवार को हिसुआ, नारदीगंज और सीतामढ़ी ओपी क्षेत्र के इलाके में जमकर उत्पात मचाया। दस वर्षीय बालक समेत चार लोग उसका शिकार बन गए। नारदीगंज के बभनौली गांव के बिनोद चौहान (40), हिसुआ थाने के सकरा गांव निवासी सेवानिवृत कर्मी आनंदी सिंह (70) व सीतामढ़ी थाना के हसनचक निवासी बालेश्‍वर यादव (60) की जान हाथी ने ले ली। वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम का उसे काबू में करने का प्रयास विफल रहा है।

घरों में दुबके हैं इलाके के लोग

घटना के बाद इलाके में दहशत व्याप्त है। लोग घरों में दुबके हैं। एक दिन पहले हाथी सिरदला प्रखंड क्षेत्र के भीतिया जंगल में दिखा था। रात में हिसुआ व नारदीगंज की तरफ आ गया। नवादा के डीएफओ अवधेश कुमार ओझा ने बताया कि हाथी को काबू में करने का प्रयास किया जा रहा है। नियमानुसार मृतकों के स्वजनों को मुआवजा दिया जाएगा। हाथी को पकडऩे के लिए गया व पटना से त्वरित कार्रवाई दल को बुलाया गया है। उसे घेरने का प्रयास किया जा रहा है।

 

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