गया । अब तक देश-दुनिया में अनेक लोगों की जान ले चुका कोरोना के संक्रमण से पूरी दुनिया डरी सहमी है। घर हो या बाजार हर तरफ कोरोना के खतरों की ही चर्चा है। बुजुर्ग, महिलाएं, मासूम बच्चे सभी डरे-सहमे हैं। इन सबके बीच गया शहर में कुछ ऐसे बिगड़ैल हैं, जिन्हें ना खुद की फिक्र है ना दूसरों की चिंता। रविवार को पीएम की अपील पर जनता क‌र्फ्यू का असर दिखा। लोगों ने थाली पीटकर, घंटी बजाकर व शंख फूंककर कोरोना की जंग में डटे उन योद्धाओं को सलाम किया। लेकिन यह क्या? अगली सुबह ही उन योद्धाओं को मायूस भी कर दिया। ये बिगड़ैल, बेपरवाह युवा अपने को तीसमार समझने वाले निकल गए यार-दोस्तों के साथ सैर-सपाटा करने। मानों एक दिन की बंदी ने ही कोराना की बाजी मार ली। ऐसे युवाओं को अपनी नहीं तो अपने पड़ोस, जिले की चिंता तो होनी ही चाहिए। किस इलाके में कौन संक्रमित है इसका अंदाजा किसी को नहीं। सोमवार को बाजार में जिस तरह से भीड़ जुटी लगा ही नहीं कि 24 घंटे पहले यही गया शहर घरों में कैद था। शहर में अनेक बेखौफ युवा अपनी बाइक पर ट्रिपल लोडिंग के साथ सड़कों पर रेस लगाते दिखे। जरूरत है पुलिस को ऐसे युवाओं से सख्ती से निपटने की। गली-मोहल्ले के लोग भी इन युवाओं को समझाएं। बेवजह घरों से निकलना इस तरह से ठीक नहीं। जरूरत है अभी ही संभलने की। वरना सबकुछ हाथ से निकल जाएगा।

Posted By: Jagran

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