गया । अनुमंडल अस्पताल को सुविधा संपन्न करने सरकार के मंसूबे पर अस्पताल प्रशासन पानी फेर रखा है। लापरवाही के कारण सरकार की योजना फाइलों में ही दफन हो रही है।

टिकारी अनुमंडलीय अस्पताल में राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए अल्ट्रासाउंड मशीन एवं उससे जुड़े उपकरण 10 माह से अस्पताल में धूल फांक रहे हैं। लापरवाह और संवेदनहीन अनुमंडलीय अस्पताल प्रशासन के कारण मरीजों को बाहर से दोगुना कीमत देकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा रहा है।

मई 2019 में राज्य स्वास्थ्य समिति के आदेश पर पश्चिम बंगाल की एक कंपनी द्वारा अनुमंडलीय अस्पताल टिकारी को अल्ट्रासाउंड मशीन एवं उससे जुड़ी अन्य उपकरण मुहैया कराई गई थी। उक्त मशीन की लागत 6 लाख 88 हजार आठ सौ रुपये है। मशीन आने के कई माह बाद भी अस्पताल आने वाले मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नसीब नही हो पाई है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन महज शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। अस्पताल परिसर में न ही अभी तक अल्ट्रासाउंड कक्ष बनाया गया और न ही संवेदक को अल्ट्रासाउंड की सुविधा शुरू कराने के लिए आदेश जारी किया गया। सूत्रों की मानें तो अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा शुरू कराने के लिए आवंटित किए गए संवेदक द्वारा कक्ष उपलब्ध कराने को लेकर कई बार सूचित किया गया, लेकिन परिणाम सिफर है।

यहां बता दें कि अनुमंडलीय अस्पताल को सुविधा युक्त बनाने के लिए क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा स्थापना काल से ही लगातार मांग की जा रही है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी है। चार प्रखंड टिकारी, कोंच, परैया और गुरारू के आमजन स्वास्थ्य सुविधा के लिए अनुमंडलीय अस्पताल पर निर्भर रहते हैं। उक्त अस्पताल में स्थापना के नौ वर्ष बाद भी लोगों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल सकी है।

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निजी केंद्र में अल्ट्रासाउंड

कराने को मजबूर हैं मरीज

अनुमंडलीय अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण इसका खामियाजा सबसे अधिक गर्भवती को उठाना पड़ता है। चिकित्सकों के अनुसार गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य जांच व गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य जांच के लिए अल्ट्रासाउंड आवश्यक होता है। अस्पताल में प्रसूति के लिए भर्ती होने वाली गर्भवती महिलाओं को मजबूरन शहर में संचालित अन्य जगहों पर जांच कराने को मजबूर होना पड़ता है, जो उनकी जेब पर असर डालता है। शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार आवाज उठाये जाने के बावजूद अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा अबतक नहीं बहाल हो सकी है। अस्पताल प्रबंधन समुचित संख्या में चिकित्सक न होने का रोना रोते रहता है।

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अल्ट्रासाउंड के इंस्टॉलेशन और रेडियोलॉजिस्ट एवं टेक्नीशियन की प्रतिनियुक्ति के लिए संबंधित एजेंसी के साथ जिला को कई बार पत्र लिखा गया है। अभी तक न तो मशीन इंस्टॉल करने कोई आया है और न ही रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति हुई है।

-डॉ. सरोज कुमार सिंह, प्रभारी अस्पताल उपाधीक्षक

Posted By: Jagran

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