संवाद सूत्र, मानपुर : बिहार के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के बेड पर बिछाने वाली शतरंगी चादर मानपुर के पटवा टोली में बनाई जाती। इसके निर्माण के लिए 88 हस्तकरघा चौबीस घंटे चलाए जा रहे हैं। इन पर प्रतिदिन करीब 50 पीस शतरंगी चादर तैयार हो रहे हैं।

सरकार ने सभी अस्पतालों में प्रतिदिन अलग-अलग रंग की चादर बिछाने की शुरुआत की। चादर को बनवाने का ठेका हैंडलूम स्टेट यूनियन ने लिया। इसी यूनियन के द्वारा दिए गए ऑर्डर पर मानपुर में शतरंगी चादर बनाई जा रही है।

चादर बनाने के दौरान गुणवत्ता की होती जांच : हस्तकरघा पर चादर तैयार होने के दरम्यान कई बार गुणवत्ता की जांच होती। बुनाई एवं वजन में थोड़ी सी भी अंतर आई तो यूनियन द्वारा चादर नहीं लिए जाते। ऐसी स्थित में बुनकरों को दूसरी चादर बनानी पड़ती। एक चादर 670 ग्राम की होती है, जिसकी चौड़ाई 60 इंच और लंबाई 110 इंच है। एक चादर को तैयार करने में करीब 220 रुपये खर्च पड़ते हैं।

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90 प्रतिशत अनुदान पर हस्तकरघा देने का प्रावधान

उघोग विभाग ने नया हस्तकरघा बुनकरों को देने की शुरुआत की। उसकी साइज 68 इंच है। जिस पर शतरंगी चादर का निर्माण काफी तीव्र गति से होगा। यह हस्तकरघा बुनकरों को 90 प्रतिशत अनुदान पर दिया जा रहा है। नए हस्तकरघा खरीदने के लिए पटना के हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय उद्योग विभाग में 51 बुनकरों द्वारा आवेदन जमा किया गया है।

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नये बुनकरों को प्रशिक्षण

की है जरूरी

हस्त करघा उद्योग पर चादर बनाने वाले बुनकरों की संख्या में कमी आ गई है। पटवा टोली में पांच वर्ष पूर्व सरकारी पहल से बुनकरों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था थी। उस वक्त यहां करीब पांच सौ हस्तकरघा उद्योग चलते थे। प्रशिक्षण केंद्र बंद होते ही बुनकरों की संख्या में कमी हो गई। अगर नए बुनकरों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था पूर्व की तरह हो जाए तो हस्तकरघा उद्योग की संख्या में वृद्धि हो जाएगी।

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ऋण मिले तो उत्पादन बढ़ जाएगा

बिहार प्रदेश बुनकर कल्याण संघ के अध्यक्ष गोपाल प्रसाद पटवा, दुखन पटवा, भेखराज प्रसाद पटवा, प्रकाश राम पटवा ने कहा कि ऑर्डर के अनुसार शतरंगी चादर हमलोग पुरा नहीं कर पाते। क्योंकि गुणवत्तापूर्ण शतरंगी चादर तैयार करने में काफी पूंजी लगते हैं। अगर हमलोगों को बैंक से ऋण दिया जाए तो चादर का उत्पादन बढ़ जाएगा।

Posted By: Jagran