यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 20, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'संस्कृत में छिपी है भारत की संस्कृति'
गया। डीएवी पब्लिक स्कूल कैंट एरिया के सभागार में श्रावणी उपाकर्म एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सह वेद

गया। डीएवी पब्लिक स्कूल कैंट एरिया के सभागार में श्रावणी उपाकर्म एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सह वेद प्रचार सप्ताह का आयोजन शनिवार को किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्जवलित कर किया गया।
मौके पर डीएवी कैंट एरिया के प्राचार्य सह डीएवी पब्लिक स्कूल्स बिहार प्रक्षेत्र-2 के क्षेत्रीय निदेशक डा.यू.एस.प्रसाद ने कहा कि वेद ज्ञान का सर्वश्रेष्ठ भंडार है। सृष्टि के आदि में प्रथम ग्रंथ वेद है। इसमें ज्ञान का अनुपम भंडार है। यह पर्व श्रावण मास में शुद्धता के लिए मनाया जाता है। उन्होंने श्रीकृष्ण के चरित्र पर भी विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण आदर्श नायक के रूप में युग प्रवर्तक रहे हैं। युद्ध क्षेत्र में मोहग्रस्त अर्जुन को अनेकानेक प्रकार से उपदेश देकर विजय लक्ष्य को प्राप्त कराया था।
डा.मुनेश्वर प्रसाद ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बहुत ही खुशी की बात है कि हम सभी संस्कृत दिवस मना रहे हैं। प्राय: विद्यालय में अंग्रेजी भाषा सुनने को मिलता है, लेकिन यहां धारा प्रवाह संस्कृत सुनने को मिला है। बच्चों में संस्कार दिखाई दे रहा है। इस तरह का कार्यक्रम प्रत्येक विद्यालय में मनाने की सलाह दी। संस्कृत में भारत की संस्कृति छिपी हुई है। उन्होंने कहा कि ज्ञान अर्जित करने की कोई उम्र सीमा नहीं होती है। सीखने के लिए कोई समय लेट नहीं माना जाता है। अब तो संस्कृत को देश ही नहीं बल्कि विदेशों में बोली जाती है। विदेशी भी भारत में आकर संस्कृत सीख रहे हैं। आज बेटियां संस्कृत में वेद का सस्वर पाठ कर रही है। जो प्रशंसनीय है। भारत में शांति है। इसका कारण यहां संस्कृत और संस्कृति दोनों है। कभी भी संस्कृत को उपेक्षा के दृष्टि से नहीं देखे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में भाषा का उच्चारण बदलाव होता है। परन्तु संस्कृत का उच्चारण जैसा भाषा रहता है, वैसा ही होता है। संस्कृत बहुत ही सरल भाषा है। संस्कृत विभिक्त युक्त भाषा है। विद्या परिश्रम से मिली है। जो परिश्रम करेंगे उन्हें ही विद्या मिलेगी। लेकिन जो परिश्रम नहीं करेंगे उन्हें कदापि विद्या की प्राप्ति नहीं होगी। मौके पर प्रश्नोत्तरी, श्लोक उच्चारण एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता में बच्चों ने भाग लिया। प्रतियोगिता का विषय पंच महायज्ञ का महत्व। इसमें प्रथम स्थान पर पांचवें वर्ग की आरोही कुमारी, दूसरे स्थान पर पांचवीं की साक्षी कुमारी और तीसरे स्थान पर आठवें वर्ग की अन्तरा सिंह रही। इन सभी को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
