पूर्वी चंपारण में घूसखोरी मामले में सख्त एक्शन, दारोगा समेत चार पुलिसकर्मी सस्पेंड
पूर्वी चंपारण में एक दारोगा और तीन सिपाहियों को एक ग्रामीण के घर में अवैध रूप से घुसने और घूस ...और पढ़ें

जांच में पुष्टि के बाद पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों को निलंबित कर दिया है।
HighLights
दारोगा और तीन सिपाही घूसखोरी के आरोप में निलंबित हुए।
बिना वारंट ग्रामीण के घर में घुसकर तलाशी ली थी।
जांच में पुष्टि होने पर एसपी ने त्वरित कार्रवाई की।
संवाद सहयोगी, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। जिले के संग्रामपुर थाना क्षेत्र से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है।
यहां गश्ती दल में तैनात एक दारोगा और तीन सिपाहियों पर एक ग्रामीण के घर बिना वैध आदेश के घुसने और घूस लेकर छोड़ने का आरोप लगा है।
मामला उजागर होने और जांच में पुष्टि के बाद पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों को निलंबित कर दिया है।
पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई
एसपी की इस सख्त कार्रवाई के बाद निलंबित होने वालों में दारोगा देव मोहन सिंह के अलावा सिपाही रवि रंजन कुमार, अभय कुमार और महिला सिपाही हेमा कुमारी शामिल हैं। घटना के बाद से ही लापरवाह पुलिसकर्मियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
बिना आदेश ली तलाशी
घटना नौ सितंबर की शाम की बताई जा रही है, जब संग्रामपुर थाने की गश्त टीम स्थानीय निवासी ओमप्रकाश कुमार के घर जबरन दाखिल हुई। पुलिसकर्मियों ने पूरे घर की तलाशी ली, लेकिन वहां से कोई भी आपत्तिजनक सामान या दस्तावेज बरामद नहीं हुआ।
छोड़ने के बदले रिश्वत
तलाशी में कुछ न मिलने के बावजूद पुलिस टीम ने गृहस्वामी ओमप्रकाश को हिरासत में ले लिया। इसके बाद उसे छोड़ने के एवज में रुपयों की अनुचित मांग की गई और पैसे लेकर उसे छोड़ा गया।
प्रशिक्षु डीएसपी ने की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी स्वर्ण प्रभात ने अरेराज की प्रभारी सह प्रशिक्षु डीएसपी कुमारी प्रियंका को मामले की निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपा था। जांच अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम का गहनता से सत्यापन किया।
स्थानीय लोगों ने की पुष्टि
जांच के दौरान दोषी पुलिसकर्मियों ने पीड़ित ओमप्रकाश को पहचानने से साफ इनकार करते हुए अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की। हालांकि, जब स्थानीय ग्रामीणों से पूछताछ की गई तो उन्होंने पुलिस की इस दबंगई और घूसखोरी की पूरी बात की पुष्टि कर दी।
वरीय अधिकारियों से छुपाई बात
जांच रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि गश्ती दल ने इस पूरी गतिविधि की कोई जानकारी अपने थानाध्यक्ष या किसी वरीय पदाधिकारी को नहीं दी थी। डीएसपी की रिपोर्ट के आधार पर ही एसपी ने यह बड़ी कार्रवाई की है।
