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Sahasralingam installation: आ गए महादेव, अब धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर चमकेगा पूर्वी चंपारण

By Sanjay Kumar Singh Edited By: Ajit kumar
Published: Sat, 17 Jan 2026 09:33 PM (IST)

पूर्वी चंपारण के विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे ऊंचे अखंड सहस्त्रलिंगम की स्थापना से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा ...और पढ़ें

इसकी स्थापना को लेकर सुबह से उत्साह दिख रहा था।

इसकी स्थापना को लेकर सुबह से उत्साह दिख रहा था।

संजय कुमार सिंह, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। Virat Ramayan Mandir Bihar :जहां धर्मध्वज लहराता है, वहां सद्गुण और प्रगति साथ-साथ आती है। और जब यह ध्वज देवाधिदेव महादेव का हो, तो समझ लीजिए कि क्षेत्र के भाग्य बदलने वाले हैं। विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व के सबसे ऊंचे अखंड शिवलिंग सहस्त्रलिंगम की स्थापना के साथ ही यह साफ हो गया है कि अब पूर्वी चंपारण धार्मिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा।

पूर्वी चंपारण पहले से ही विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूप (केसरिया) के कारण अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है। अब जानकीनगर स्थित विराट रामायण मंदिर में सहस्त्रलिंगम की स्थापना से यह इलाका आस्था, संस्कृति और पर्यटन का नया केंद्र बनता दिख रहा है। खास बात यह है कि प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या और माता जानकी की जन्मस्थली जनकपुर को जोड़ने वाला राम-जानकी पथ, केसरिया बौद्ध स्तूप और विराट रामायण मंदिर—दोनों को जोड़ता है। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यहां तक पहुंच और भी आसान हो जाएगी।

करीब 120 एकड़ क्षेत्र में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर न सिर्फ अपनी भव्य संरचना के लिए जाना जाएगा, बल्कि विश्व के सबसे बड़े अखंड शिवलिंग के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। मंदिर की 270 फीट ऊंची भव्य संरचना दूर से ही लोगों को अपनी ओर खींचेगी। यही आस्था भविष्य में विकास, रोजगार और समृद्धि का आधार बनेगी।

सहस्त्रलिंगम की पीठ पूजा में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भावुक होकर कहा कि “अब हमारे घर प्रभु पधार चुके हैं। अब सब अच्छा होगा, अब तो इस धरती पर प्रगति के मार्ग ही मार्ग हैं।” लोगों का मानना है कि यह स्थापना पूरे क्षेत्र के लिए शुभ संकेत है।

मधुबन विधायक इंजीनियर राणा रणधीर सिंह का कहना है कि यह स्थल केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक समृद्धि का द्वार भी साबित होगा। राम-जानकी पथ विकास की रफ्तार को और तेज करेगा। सरकार भी इस क्षेत्र को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

मंदिर निर्माण समिति के सचिव ललन सिंह ने बताया कि आज भोलेनाथ विराजमान हुए हैं और बहुत जल्द प्रभु श्रीराम का भी दर्शन यहां संभव होगा। इतने बड़े धार्मिक संयोग किसी भी क्षेत्र को विकास की दिशा में अग्रसर कर देते हैं। आने वाले वर्षों में जो इलाका कभी वीरान नजर आता था, वही श्रद्धालुओं और सैलानियों की भीड़ से गुलजार होगा।

14 वर्षों की साधना, 10 वर्षों का निर्माण

गौरतलब है कि 20 जून 2023 से विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। कैथवलिया स्थित जिस भूखंड पर मंदिर बन रहा है, उसे जानकी नगर नाम दिया गया है। अब आधार पीठ के तैयार होने के बाद 33 फीट ऊंचे विश्व के सबसे बड़े सहस्त्रलिंगम की स्थापना की गई है।

इस शिवलिंग के निर्माण में पूरे 10 वर्ष लगे हैं। इसका निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडु गांव के शिल्पकारों ने किया है। प्रस्तावित मंदिर का आकार 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा, जिसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर शामिल होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी, जो इसे विश्वस्तरीय पहचान दिलाएगी।