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रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना: भूमि अधिग्रहण अंतिम चरण में, जल्द उड़ान भरेंगे वाणिज्यिक विमान

Published: Thu, 09 Jul 2026 05:55 AM (GMT+05:30)

Raxaul Airport Project: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना निर्णायक चरण में है, जहाँ रनवे विस्तार के लिए 139 ...और पढ़ें

अब तक 160 से अधिक भूस्वामियों के दस्तावेजों का सफल सत्यापन किया जा चुका है। प्रतीकात्मक फोटो

अब तक 160 से अधिक भूस्वामियों के दस्तावेजों का सफल सत्यापन किया जा चुका है। प्रतीकात्मक फोटो

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जागरण संवाददाता, रक्सौल (पूर्वी चंपारण)। India Nepal Border Airport: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पूर्वी चंपारण जिले की बहुप्रतीक्षित रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच गई है।

एयरपोर्ट के रनवे विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। जिला प्रशासन ने उन सभी भूस्वामियों से तुरंत अपने आवश्यक दस्तावेज जमा कर मुआवजा राशि प्राप्त करने की अपील की है, जिन्होंने अब तक भुगतान नहीं लिया है।

दस्तावेज जमा न करने पर कोर्ट जाएगी राशि

प्रशासन ने भूस्वामियों को सचेत करते हुए स्पष्ट किया है कि यह मुआवजा प्राप्त करने का आखिरी अवसर है। यदि निर्धारित समय के भीतर भूस्वामी अपने कागजात जमा नहीं करते हैं, तो उनकी मुआवजा राशि 'भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण' (LARA) कोर्ट में जमा करा दी जाएगी।

इसके बाद भूस्वामियों को अपनी ही राशि निकालने के लिए कोर्ट-कचहरी की लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

हफ्ते में 3 दिन विशेष शिविर

अनुमंडल कार्यालय सूत्रों ने एसडीओ मनीष कुमार के हवाले से बताया कि भूस्वामियों की सहूलियत के लिए जिला प्रशासन प्रत्येक सप्ताह तीन दिन विशेष शिविरों का आयोजन कर रहा है।

इन कैंपों में जमीन के दस्तावेजों की जांच, उनका सत्यापन (वेरिफिकेशन) और भुगतान से जुड़ी सभी औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं। अब तक 160 से अधिक भूस्वामियों के दस्तावेजों का सफल सत्यापन किया जा चुका है।

जमीन मिलते ही दौड़ेगा रनवे का काम

रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना के लिए बिहार सरकार पहले ही 207.70 करोड़ रुपये की भारी-भरकम मुआवजा राशि जारी कर चुकी है।

बची हुई कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही लगभग 139 एकड़ अतिरिक्त भूमि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को सौंप दी जाएगी। जमीन हस्तांतरण के बाद रनवे विस्तार और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो जाएगा।

कमर्शियल विमान भर सकेंगे उड़ान

रनवे का विस्तार पूरा होने के बाद भविष्य में रक्सौल से एटीआर-72 (ATR-72) जैसे बड़े वाणिज्यिक विमानों के संचालन का रास्ता साफ हो जाएगा। इससे न केवल रक्सौल बल्कि पूरे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के लोगों को हवाई सफर की शानदार सुविधा मिलेगी।

साथ ही, इस एयरपोर्ट के चालू होने से सीमावर्ती इलाकों में व्यापार, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए पंख लगेंगे। इस परियोजना को पूर्वी चंपारण के आर्थिक विकास के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।