नेपाल जल प्रलय: जिन्हें नदी बहा ले गई वो चले गए..., जो बचे वो रेत के बीच तलाश रहे जीवन
Nepal Natural Disaster: नेपाल के रसुआ, नुवाकोट, धादिंग और गोरखा जिलों में प्राकृतिक आपदा (बाढ़) से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त ...और पढ़ें

बाढ़ का पानी कम होने के बाद गांवों में निकलते लोग और नदी की तेज धारा में तबाह मकान। सौ. ग्रामीण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संजय कुमार उपाध्याय, काठमांडू (नेपाल)। Nepal Natural Disaster: नेपाल के चार प्रमुख जिलों रसुआ, नुवाकोट, धादिंग और गोरखा में प्राकृतिक आपदा के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के उफान के सामने रिहायशी इलाकों के साथ-साथ कई धार्मिक स्थल भी पूरी तरह तबाह हो गए हैं।
धार्मिक स्थलों को नुकसान
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदियों के तेज बहाव ने आस्था के केंद्रों को भी भारी क्षति पहुंचाई है, जिन्हें पुनर्जीवित करने में काफी समय लगेगा।
इंसानी जीवन के साथ-साथ बड़ी संख्या में बेजुबान पशु भी इस भीषण आपदा की चपेट में आ गए हैं। नुवाकोट जिले के बेतरावती बाजार में बाढ़ के कारण व्यावसायिक और आवासीय ढांचे पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुके हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाके में फंसे वाहन को लेकर निकलते चालक। सौ. ग्रामीण
रेत में तलाशते जिंदगी
काठमांडू में टैक्सी चलाने वाले सुभाष थापा के अनुसार बाढ़ में जिनका सब कुछ बह गया, वे अब बचे हुए सामान और रेत के बीच जीवन तलाश रहे हैं।
मकानों से गृहस्थी का सारा सामान बह चुका है और अब केवल कीचड़, मलबा तथा बालू ही नजर आ रही है। रोजी-रोजगार के सभी साधन समाप्त होने से स्थानीय लोगों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
गोसाईं कुंड में फंसे
सावन पूर्णिमा के अवसर पर मानसरोवर यात्रा के तहत गोसाईं कुंड स्नान के लिए पहुंचे कई श्रद्धालु रसुआ क्षेत्र में मार्ग अवरुद्ध होने से फंस गए हैं। रसुआ का इलाका अप-स्ट्रीम में होने के कारण ग्लेशियर पिघलने से आई बाढ़ का पहला और सबसे घातक प्रभाव यहीं पड़ा।
स्थानीय व्यवसायी कलानंद मिश्र का कहना है कि आधारभूत संरचनाओं के नष्ट होने से लोगों को सामान्य स्थिति में लौटने में वर्षों का समय लगेगा।
