विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'चीनी, आलू, मिठाई सब खाइए, डायबिटीज कंट्रोल हो जाएगी'... मोतिहारी में डॉक्टर के दावे पर स्वास्थ्य विभाग की जांच

Published: Sun, 06 Sep 2026 10:37 PM (GMT+05:30)

मोतिहारी में एक कथित चिकित्सक द्वारा डायबिटीज के इलाज को लेकर किए गए भ्रामक दावों पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. मोतिहारी में डॉक्टर के डायबिटीज इलाज के दावों की जांच।

  2. बिना परहेज चीनी, आलू, मिठाई खाने का किया था दावा।

  3. स्वास्थ्य विभाग ने क्लीनिक बंद पाया, डॉक्टर को नोटिस भेजा।

संवाद सहयोगी, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। चीनी, आलू और मिठाई खाते रहिए, परहेज की जरूरत नहीं... दवा से डायबिटीज कंट्रोल हो जाएगा। हेनरी बाजार में लगे एक कथित चिकित्सक के क्लीनिक के बोर्ड पर लिखे ऐसे दावों ने स्वास्थ्य विभाग का ध्यान खींचा है।

मामले में शिकायत मिलने के बाद विभाग ने जांच शुरू कर दी है। संबंधित चिकित्सक की डिग्री और डायबिटीज विशेषज्ञ होने के दावे की भी जांच की जा रही है। बताया जाता है कि सहयोग पोर्टल पर शिकायत के बाद सिविल सर्जन के निर्देश पर एक जांच कमेटी गठित की गई।

टीम हेनरी बाजार स्थित संबंधित क्लीनिक पर शनिवार को पहुंची। एसीएमओ डा. एसएन सत्यार्थी के नेतृत्व में पहुंची टीम को क्लीनिक अंदर से बंद मिला। चिकित्सक भी वहां मौजूद नहीं थे। टीम ने काल बेल बजाया, लेकिन दरवाजा नहीं खोला गया।

क्लीनिक के बाहर लगे बोर्ड पर बिना परहेज चीनी का इलाज, आलू, चीनी, मिठाई सब खाइए जैसे दावे लिखे थे। बोर्ड पर डा. संतोष कुमार, एमडी, गोल्ड मेडलिस्ट, पीजी इन डायबिटोलाजी आदि का उल्लेख था।

एसीएमओ डा. एसएन सत्यार्थी ने बताया कि संबंधित चिकित्सक को अपनी सभी शैक्षणिक योग्यता, डिग्री, पंजीकरण और अन्य कागजात के साथ उपस्थित होने के लिए पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के भ्रामक दावे नियमों के विपरीत हैं। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

डिग्री से लेकर दावे तक की होगी पड़ताल

बताया गया है कि अब स्वास्थ्य विभाग की जांच केवल क्लीनिक पर लगे बोर्ड तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित चिकित्सक ने जिस डिग्री और विशेषज्ञता का उल्लेख किया है, उसकी वैधता और पंजीकरण की भी जांच की जाएगी। साथ ही मरीजों के इलाज में किए जा रहे दावों और उनके चिकित्सकीय आधार को भी जांच के दायरे में रखा जा सकता है।

हार्ट-डायबिटीज-लीवर के इलाज के नाम पर बाजार

गंभीर बीमारियों के इलाज के नाम पर शहर से लेकर गांव तक बड़े-बड़े दावों वाले पोस्टर और बोर्ड लगे मिलते हैं। कहीं हार्ट का इलाज करने का दावा है तो कहीं डायबिटीज को जड़ से खत्म करने की बात।

लीवर और दूसरी गंभीर बीमारियों के लिए भी आकर्षक दावों के साथ मरीजों को अपनी ओर खींचने की कोशिश की जाती है। सबसे चिंताजनक स्थिति तब होती है, जब इलाज के साथ गारंटी और बिना परहेज बीमारी ठीक करने जैसे दावे किए जाते हैं।

बीमारी से परेशान मरीज ऐसे दावों पर भरोसा कर इलाज शुरू करा देते हैं। विशेषज्ञता और डिग्री की वास्तविक स्थिति जाने बिना इलाज कराने से मरीजों की परेशानी कई बार कम होने के बजाए बढ़ जाती है।

हार्ट विशेषज्ञ की डिग्री पर भी उठ चुका सवाल

शहर के एक नामचीन कथित हार्ट रोग विशेषज्ञ की डिग्री को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। इस मामले में फिलहाल जांच और सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है। लोगो का कहना है कि आखिरकार ऐसे संस्थानों व चिकित्सकों की नियमित जांच क्यों नहीं की जाती।

मरीज की सुरक्षा से खिलवाड़

विशेषज्ञ बताते हैं कि हार्ट, डायबिटीज और लीवर जैसी बीमारियों में मरीज लंबे समय तक इलाज कराते हैं। ऐसे में चिकित्सक की योग्यता और इलाज के दावे की विश्वसनीयता सीधे मरीज की सुरक्षा से जुड़ी होती है। खासकर डायबिटीज के इलाज में लापरवाही मरीज के हार्ट, किडनी जैसे संवेदनशील आर्गन को खराब कर सकते हैं।