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न नियमों की चिंता, न जांच का डर... पूर्वी चंपारण के पताही में बेखौफ चल रहा अवैध दवा कारोबार

Published: Thu, 13 Aug 2026 01:16 PM (IST)

पूर्वी चंपारण के पताही में बिना लाइसेंस के दवा दुकानों का संचालन और किराना दुकानों पर अंग्रेजी दवाओं की बिक्री ...और पढ़ें

इस मैटर पर प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इस मैटर पर प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. पताही में बिना लाइसेंस चल रही हैं दो दर्जन से अधिक दुकानें।

  2. किराना और पान दुकानों पर भी बिक रही हैं अंग्रेजी दवाएं।

  3. ड्रग्स विभाग ने छापेमारी में 34 प्रकार की दवाएं जब्त कीं।

संवाद सहयोगी, पताही (पूर्वी चंपारण)। बीमारी चाहे छोटी हो या बड़ी, दवा के नाम पर लोगों को क्या मिल रहा है और वह कहां से आ रही है, इसकी पड़ताल अब जरूरी हो गई है।

पताही प्रखंड क्षेत्र में बिना अनुज्ञप्ति दवा दुकानों के संचालन और किराना-पान दुकानों तक अंग्रेजी दवाओं की बिक्री की चर्चा ने दवा कारोबार की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन दिन पहले ड्रग्स विभाग की छापेमारी में 34 प्रकार की दवाएं जब्त होने के बाद यह मामला और चर्चा में है।

सरकार दवा के अवैध कारोबार पर नकेल कसने के लिए लगातार नियम-कानून लागू कर रही है। खुदरा और थोक दवा विक्रेताओं के लिए निर्धारित मानकों और अनुज्ञप्ति की व्यवस्था भी है। इसके बावजूद पताही प्रखंड क्षेत्र में नियमों की अनदेखी कर दवा का कारोबार किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

दो दर्जन से अधिक दुकानों के संचालन की चर्चा

स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रखंड क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक दवा दुकानें बिना अनुज्ञप्ति संचालित हो रही हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

कई गांवों और टोलों में झोलाछाप चिकित्सकों के आसपास छोटी-बड़ी दवा दुकानें चलने की बात कही जा रही है। कई जगह बकायदा बोर्ड लगाकर दवाओं की बिक्री की जा रही है।

किराना और पान दुकानों तक पहुंचीं अंग्रेजी दवाएं

ग्रामीण क्षेत्रों में किराना और पान दुकानों से भी अंग्रेजी दवाओं की बिक्री किए जाने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिरदर्द, पेट दर्द, बुखार और पेट खराब जैसी सामान्य परेशानियों के नाम पर कई दुकानदार बिना चिकित्सकीय सलाह के ही दवा उपलब्ध करा देते हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि दवाओं की बिक्री और उसके स्रोत की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है।

बिना रिकॉर्ड बिक्री पर उठे सवाल

जानकारों का कहना है कि वैध दवा दुकानों पर दवा की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड, बिल और लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया होने से निगरानी अपेक्षाकृत आसान होती है। इसके विपरीत अनधिकृत तरीके से दवा की बिक्री होने पर उसके स्रोत और गुणवत्ता की जांच मुश्किल हो सकती है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही कथित अवैध दुकानों की जांच की मांग उठ रही है।

छापेमारी में जब्त हुईं 34 प्रकार की दवाएं

इस बीच तीन दिन पहले पताही प्रखंड मुख्यालय स्थित बाजार में ड्रग्स विभाग की टीम ने एक दवा दुकान में छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान 34 प्रकार की दवाएं जब्त की गई थीं। इसके बाद स्थानीय स्तर पर नियमित जांच और निगरानी की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

दुकान को तत्काल सील क्यों नहीं किया गया?

स्थानीय लोगों का कहना है कि छापेमारी के दौरान दवाएं जब्त किए जाने के बावजूद संबंधित दुकान को तत्काल सील नहीं किए जाने की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

यदि किसी दुकान में गंभीर अनियमितता मिलती है तो आगे की जांच और विभागीय कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। लोगों ने जिलाधिकारी से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने और प्रखंड क्षेत्र में संचालित सभी दवा दुकानों की जांच कराने की मांग की है।