मोतिहारी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों एवं प्रारंभिक विद्यालयों में मेडिकल टीम द्वारा की गई स्क्रीनिग में दिल में छेद जैसी समस्या से जूझ रहे बच्चों को चिन्हित किया गया है। उक्त जानकारी देते आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि अप्रैल से अब तक की गई स्क्रीनिग में 38 बच्चों को दिल के संभावित मरीज के रूप में चिन्हित किया गया था। इन बच्चों का रोटरी लेक टाउन के सहयोग से इको कार्डियोग्राम कराया गया है। इनमें से 20 बच्चों में दिल में छेद होने की पुष्टि हो चुकी है। शेष बच्चों की जांच प्रक्रिया अभी बाकी है। माना जा रहा है कि इनकी संख्या और बढ़ सकती है। डॉ. मनीष ने कहा कि इलाज के लिए भारत सरकार ने बेहतर व्यवस्था की है। हमारा करार (एमओयू) पीएमसीएच एवं इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान पटना के साथ है। इन बच्चों की सूची वहां भेजी जा रही है। समय निर्धारित होते ही इन्हें इलाज के लिए वहां ले जाया जाएगा। इस कार्य में रोटरी लेक टाउन का भी सहयोग मिल रहा है। यहां बता दें कि इससे पूर्व भी जिले के ऐसे बच्चे आरबीएसके द्वारा चिन्हित किए गए थे। उनमें से हरसिद्धि के एक बच्चे की समुचित इलाज के अभाव में मौत भी हो गई थी। यह मामला विधान परिषद में भी उठाया गया था। सरकार के आश्वासन के बाद भी इन बच्चों के इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी थी। चूंकि इन बच्चों की जांच के बाद तब इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान ने इन्हें दिल्ली रेफर किया था। मगर उन्हें वहां नहीं ले जाया जा सका। इसके बाद रोटरी ने पहल करते हुए छह बच्चों का सफल ऑपरेशन वर्ष 2018 में चेन्नई के माता अमृतामयी अस्पताल में कराया गया था। सभी बच्चे अब स्वस्थ हैं। डॉ. मनीष ने बताया कि रविवार को कराए गए इको कार्डियोग्राम जांच में सामने आए दिल के मरीज बच्चों में कुछ की स्थिति चिताजनक है। हमारा प्रयास है कि उन्हें जल्द से जल्द इलाज के पटना पहुंचाया जाए। वहां से लगातार संपर्क किया जा रहा है।

Posted By: Jagran

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