पूर्वी चंपारण में 350 करोड़ की लागत से बनेगा हाईटेक डेयरी प्लांट, रोज प्रोसेस होगा 4 लाख लीटर दूध
पूर्वी चंपारण में 350 करोड़ रुपये की लागत से चार लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला नया दुग्ध प्रसंस्करण प्लांट स्थापित होगा, जिससे दुग्ध उत्पादन और किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा।

पूर्वी चंपारण में 350 करोड़ की लागत से बनेगा हाईटेक डेयरी प्लांट (AI Generated Image)
HighLights
पूर्वी चंपारण में 350 करोड़ का नया दुग्ध प्लांट बनेगा।
यह प्लांट प्रतिदिन चार लाख लीटर दूध संसाधित करेगा।
किसानों को बेहतर बाजार और 400-500 लोगों को रोजगार मिलेगा।
जागरण संवाददाता, मोतिहारी। चंपारण में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को दूध का बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ी पहल होने जा रही है। जिले में करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से चार लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला नया दुग्ध प्रसंस्करण प्लांट स्थापित किया जाएगा।
इसके लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। जमीन मिलते ही परियोजना पर काम शुरू होने की उम्मीद है। प्लांट के संचालन से प्रत्यक्ष रूप से करीब 400 से 500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
महात्मा गांधी प्रेक्षागृह में आयोजित तीन दिवसीय कृषि, पशुपालन एवं मात्स्यिकी उद्यमी मेला के समापन समारोह में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक मिनेष शाह ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जिले में एनडीडीबी का प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। पीपराकोठी में केंद्र के लिए जमीन उपलब्ध होने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रशिक्षण केंद्र शुरू होने से किसानों और कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों को प्रशिक्षण के लिए सिलीगुड़ी या दूसरे शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
1500 गांवों से रोज 1.50 लाख लीटर दूध का संग्रह
मिनेष शाह ने बताया कि किसानों को दूध का उचित मूल्य और पूरे वर्ष बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2017 में बापूधाम मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन की शुरुआत की गई थी। किसानों के स्वामित्व वाली यह संस्था आज चंपारण सहित आसपास के जिलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है।
वर्तमान में करीब 1500 गांवों से प्रतिदिन 1.50 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है। दूध उत्पादन और कारोबार के लगातार बढ़ते दायरे को देखते हुए अब प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
किसानों के खातों में पहुंचाए एक हजार करोड़
बताया कि दूध की कीमत के रूप में अब तक एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। 60 हजार से अधिक किसान नियमित रूप से संस्था को दूध उपलब्ध करा रहे हैं।
गांव-गांव बढ़ रहे दूध संग्रह को देखते हुए चार लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले नए प्लांट की योजना तैयार की गई है। जमीन आवंटित होने के बाद परियोजना पर तेजी से काम शुरू होने की उम्मीद है।
पांच वर्ष में 6500 गांवों में बनेंगी दुग्ध समितियां
सरकार के सहकारिता विस्तार अभियान के तहत बिहार में अगले पांच वर्षों में करीब 6500 गांवों में नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, करीब छह हजार गांवों में पहले से संचालित समितियों को भी मजबूत किया जाएगा।
समितियों में स्वचालित दूध संग्रह केंद्र और बल्क मिल्क कूलर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे किसानों को गांव के स्तर पर ही दूध बेचने और सुरक्षित तरीके से संग्रह की सुविधा मिलेगी।
2700 गांवों में कृत्रिम गर्भाधान की सेवा
पशुओं की नस्ल सुधारने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। इसके तहत 100 कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों को प्रशिक्षित किया गया है। ये तकनीशियन करीब 2700 गांवों में किसानों को सेवा उपलब्ध करा रहे हैं।
योजना से 25 हजार से अधिक किसान जुड़े हैं। परियोजना के तहत करीब 30 हजार उन्नत नस्ल की गाय तैयार करने का लक्ष्य है। इससे क्षेत्र में प्रतिदिन करीब एक लाख लीटर अतिरिक्त दूध उत्पादन की संभावना जताई गई है।
सेक्स-सॉर्टेड सीमेन से बढ़ेगी मादा बछियों की संख्या
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे करीब 90 प्रतिशत तक मादा बछिया पैदा होने की संभावना रहती है। अच्छी नस्ल की मादा बछियों की संख्या बढ़ने से आने वाले वर्षों में किसानों की दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। इसका सीधा असर उनकी आय पर भी पड़ेगा।
हेफर सेंटर व आईवीएफ तकनीक पर भी जोर
चंपारण में अच्छी नस्ल की गायों के लिए हेफर डेयरी सेंटर विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही आइवीएफ और भ्रूण प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उन्नत नस्ल तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।
अधिकारियों का मानना है कि नस्ल सुधार, गांव स्तर पर दूध संग्रह की सुविधा और नए प्रसंस्करण प्लांट के एक साथ विकसित होने से चंपारण में पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन को नई गति मिलेगी। इसके अलावा जिले में एक बेहतर फार्म स्थापित होगा जहां 30 हजार गायों का नस्ल सुधार किया जाएगा।
