पूर्वी चंपारण : 200 साल से बसे घरों पर खाली करने का नोटिस, पहले मिला PM आवास का लाभ; कचुरबारी में बेचैनी
पूर्वी चंपारण के कचुरबारी में 200 साल से बसे 15 परिवारों को सरकारी जमीन खाली करने का दूसरा नोटिस मिला ...और पढ़ें

सरकार की ओर से मिले नोटिस को दिखाते ग्रामीण।
HighLights
कचुरबारी में 200 साल से बसे 15 परिवारों को नोटिस।
सरकारी जमीन खाली करने का दूसरा नोटिस जारी हुआ।
कई परिवारों को पीएम आवास योजना का लाभ मिला था।
संवाद सहयोगी, आदापुर (पूर्वी चंपारण)। कचुरबारी में करीब 200 साल से बसे परिवारों के सामने अब घर बचाने की चिंता खड़ी हो गई है। सरकारी जमीन पर पीढ़ियों से रह रहे करीब 15 परिवारों को जमीन खाली करने का दूसरा नोटिस मिला है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवारों को इसी जमीन पर बने घरों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिल चुका है। ऐसे में एक ओर आवास का लाभ मिलने और दूसरी ओर जमीन खाली करने का नोटिस आने से परिवारों में बेचैनी बढ़ गई है।
15 परिवारों को मिला दूसरा नोटिस
यह मामला श्यामपुर हल्का अंतर्गत कचुरबारी मौजा की खाता संख्या 213 एवं खेसरा संख्या 865 की जमीन से जुड़ा है। अंचल कार्यालय की ओर से करीब 15 लोगों को जमीन खाली करने के लिए दूसरा नोटिस भेजा गया है। नोटिस मिलने के बाद संबंधित परिवार अपने घर और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
नोटिस पाने वालों में किशोरी यादव, खुरखुन प्रसाद यादव, शंकर यादव, शिवनाथ यादव, भोला राय, रामायोध्या यादव, महेंद्र यादव, नवलेश ठाकुर और जयचंद्र यादव समेत अन्य लोग शामिल हैं।
पीढ़ियों से यहीं रह रहे ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वज करीब 200 वर्षों से यहां रहते आ रहे हैं। उनके पास रहने के लिए दूसरी जमीन नहीं है। खुद को भूमिहीन बताते हुए ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्हें यहां से हटाया गया तो परिवारों के सामने आवास की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी।
PM आवास का लाभ मिलने पर उठे सवाल
ग्रामीणों के अनुसार, इनमें कई परिवारों को पहले प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला था। इसके बाद उन्होंने इसी जमीन पर घर बनाकर रहना शुरू किया। अब जमीन खाली करने का नोटिस मिलने पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब आवास योजना का लाभ दिया गया, तब जमीन की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई।
पहले वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार भूमिहीन परिवारों को आवास के लिए जमीन उपलब्ध कराने की बात करती है। ऐसे में उन्हें हटाने से पहले रहने की वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए। परिवारों ने मांग की है कि उनके आवास की समस्या का समाधान किए बिना जमीन खाली कराने की कार्रवाई नहीं की जाए।
कहती हैं अंचलाधिकारी
अंचलाधिकारी प्रज्ञा नयनम ने कहा कि अतिक्रमित भूमि को खाली करने के लिए यदि किसी व्यक्ति को नोटिस मिला है तो वह अंचल कार्यालय में आकर अपना पक्ष रख सकता है कि उक्त भूमि से उसे क्यों नहीं हटाया जाना चाहिए।
