रक्सौल। रक्सौल-सुगौली रेलखंड के रामगढ़वा स्टेशन के फ्रेट टर्मिनल पर सामान की लोडिग व अनलोडिग की जा रही। इससे उड़ते धूलकण से लोग परेशान हैं, लेकिन रेलवे इस पर ब्रेक लगाने के प्रति गंभीर नहीं दिख रहा है। धूलकण से दिन में ही रात्रि का नजारा देखने को मिल रहा। इस क्षेत्र के लोग जिदगी व धूलकण के बीच जंग लड़ रहे हैं। अधिकारी पानी छिड़काव की बात कहते, लेकिन हकीकत कुछ और है। अगर पानी छिड़काव की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो स्थानीय रेलवे अधिकारियों के दावे खोखले हो जाएंगे। लोगों की चर्चाओं पर गौर करें तो स्थानीय माल अधीक्षक द्वारा पानी छिड़काव पर कोई ठोस पहल नहीं की जाती है। मालगोदाम में काम करने वाले मजदूर व स्थानीय रेलवे स्टेशन में कार्यरत रेल कर्मी भी दबी जुबान से स्वीकार करते है। साथ ही रेलवे परिक्षेत्र में संचालित अधिकृत दुकानदार भी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते है कि रेलवे लोगों की जिदगी के साथ खिलवाड़ कर रहा है। दुकानदार कहते है कि सामान पर धूलकण की परत जम जा रही है। इसके कारण सामान की बिक्री प्रभावित हो रही। धूलकण व जिदगी के बीच जंग जारी है। स्टेशन के आसपास के गांव नवकठवा, चिकनी व भलुवहिया के लोग काफी प्रभावित हो रहे हैं। कई सरकारी व गैर सरकारी स्कूल भी हैं, जहां हजारों बच्चे नामांकित हैं। उड़ते धूलकण की तबाही घरों के किचेन तक भी पहुंच रही है। इससे जाहिर है कि रेलवे लोगों को समय से पहले मौत देने की तैयारी में है। जानकार बताते हैं कि सांस के माध्यम से धूलकण फेफड़े तक पहुंचते हैं। जिसके कारण लोग विभिन्न प्रकार की श्वास संबंधी बीमारियों से ग्रसित हो रहे। अगर पानी का छिड़काव कर धूलकण पर ब्रेक नहीं लगाया गया तो स्थानीय लोग जनहित याचिका दायर करने के साथ-साथ मानवाधिकार आयोग का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं। जानकारी के अनुसार इस फ्रेट टर्मिनल पर एक माह में 15 से 20 मालगाड़ियों की लोडिग अनलोडिग की जाती है। इस दौरान उड़ते धूलकण को लेकर जनहित का ख्याल नहीं रखा जाता है। इसको लेकर रेलवे प्रशासन के विरुद्ध लोगों में आक्रोश व्याप्त है। सामान मंगाने वाली पार्टी को लिखित मेमो देकर सामान की लोडिग अनलोडिग के समय पानी का छिड़काव का निर्देश दिया गया है। बीते सोमवार को पानी का छिड़काव किया गया था। -- आनंद कुमार, माल अधीक्षक, रामगढ़वा

Edited By: Jagran