गोरखपुर में 1095 दिन पहले बिछड़ी मां बिहार में मिली, बेटे-बहू बोले- संसार मिल गया
बिहार के रक्सौल में तीन साल बाद एक मां-बेटे का भावुक मिलन हुआ, जहां 65 वर्षीय ज्ञानती देवी अपने बेटे ...और पढ़ें

बेटा और बहू के साथ तीन वर्ष पूर्व बिछड़ गई महिला साथ में पुलिस पदाधिाकरी व माहेर के प्रबंधक। सौ. संस्था
HighLights
ज्ञानती देवी तीन साल बाद अपने बेटे अनिल से मिलीं।
माहेर ममता निवास ने आश्रयहीन मां को देखभाल प्रदान की।
रक्सौल स्टेशन पर भटकती मिली थीं ज्ञानती देवी।
जागरण संवाददाता, रक्सौल (पूर्वी चंपारण)। मां से बिछड़ने का दर्द और फिर वर्षों तक उसकी तलाश...। जब उम्मीदें कमजोर पड़ने लगीं, तब रक्सौल में ऐसा पल आया जिसने बेटे की आंखों में खुशी के आंसू ला दिए।
गोरखपुर स्टेशन पर परिवार से बिछड़ी 65 वर्षीय ज्ञानती देवी तीन साल बाद अपने बेटे अनिल कुमार से मिलीं। मां को सामने देखते ही अनिल भावुक हो गए। उन्होंने कहा, मां से मिला तो लगा जैसे संसार मिल गया।
भटकते लोगों को मिलता है सहारा
शहर और गांव की सड़कों पर भटकते आश्रयविहीन लोगों को अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं। लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं, जो उनकी सूचना पुलिस या समाजसेवी संस्थाओं को देते हैं।
इसके बाद रेस्क्यू कर ऐसे लोगों को माहेर ममता निवास पहुंचाया जाता है। यहां करीब तीन दर्जन से अधिक आश्रयविहीन लोग रह रहे हैं। इनमें मानसिक रोग और अन्य बीमारियों से पीड़ित लोग भी शामिल हैं।
इलाज के बाद लौटती हैं अपनों की यादें
ममता निवास में रहने वाले लोगों को उपचार और देखभाल उपलब्ध कराई जाती है। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद कई लोग अपने गांव, परिवार और स्वजनों की जानकारी देने लगते हैं। इसके आधार पर पुलिस और सामाजिक संस्थाओं की मदद से उनके परिवार की तलाश शुरू की जाती है। वर्षों बाद अपनों से मिलन के ऐसे क्षण भावुक कर देने वाले होते हैं।
तीन साल पहले रक्सौल स्टेशन से हुआ था रेस्क्यू
बताया गया कि ज्ञानती देवी तीन वर्ष पहले रक्सौल स्टेशन पर भटकती मिली थीं। उस समय उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। उन्हें रेस्क्यू कर माहेर ममता निवास लाया गया, जहां उपचार और देखभाल के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि वह गोरखपुर स्टेशन पर परिवार से बिछड़ गई थीं।
कासगंज से मां को लेने पहुंचे अनिल
मां के मिलने की सूचना के बाद उत्तर प्रदेश के कासगंज से अनिल कुमार रक्सौल पहुंचे। लंबे इंतजार के बाद मां को सामने पाकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। माहेर के प्रबंधक बीरेंद्र कुमार ने बताया कि रक्सौल थाना की एसआइ जेबा प्रवीण की मौजूदगी में ज्ञानती देवी को उनके पुत्र को सौंप दिया गया।
खुशियों में शहरवासी भी बनते हैं सहभागी
ममता निवास में रहने वाले आश्रयविहीन लोगों के साथ शहरवासी भी खुशियां बांटते हैं। जन्मदिन और वैवाहिक वर्षगांठ जैसे अवसरों पर लोग यहां मिठाइयां और उपहार लेकर पहुंचते हैं। ऐसे प्रयासों से जरूरतमंद लोगों को अपनापन और सहारा मिलता है।
