विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गांधीजी के तीन बंदर अब बचाएंगे साइबर ठगी से, अब ठगों का खेल होगा फेल, मोतिहारी में बना सुरक्षा मंत्र

Published: Tue, 06 Oct 2026 07:00 AM (IST)

पूर्वी चंपारण पुलिस ने साइबर ठगी से बचाने के लिए गांधीजी के तीन बंदरों के संदेश को जागरूकता अभियान का ...और पढ़ें

इसमें एआई जनरेटेड तस्वीर लगाई गई है।

इसमें एआई जनरेटेड तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. मोतिहारी पुलिस ने साइबर ठगी रोकने को नया जागरूकता अभियान चलाया।

  2. गांधीजी के तीन बंदरों के संदेश को बनाया गया साइबर सुरक्षा मंत्र।

  3. संदिग्ध लिंक, फर्जी ऑफर से बचने के तरीके लोगों को सिखाए जा रहे।

संजय कुमार उपाध्याय, मोतिहारी। साइबर अपराधियों के तंत्र को तोड़ने और उससे बचाने को गांधीजी के तीन बंदर तैयार हैं। ये हिंसात्मक नहीं, अहिंसा के हथियार से...। साइबर पुलिस के ये हथियार हैं।

जागरूकता से लेकर सुरक्षा तक, इन्हीं के माध्यम से...। अब कैसे? पूर्वी चंपारण जिला पुलिस ने गांधीजी के तीन बंदरों के संदेशात्मक व्यवहार को सुरक्षा हथियार बनाया है।

साइबर ठगों पर शिकंजा कसने के साथ ही पुलिस सुरक्षा के गुर से लोगों को अवगत करा रही। साइबर अपराध से संबंधित घटनाओं की केस स्टडी और ठगी के तौर-तरीकों को समझने-जानने के बाद गांधी जयंती पर तीन बंदरों वाले मंत्र को जनजागरूकता का हथियार बनाया है।

ठगी के दांव-पेच में शातिरों को पटखनी देने के लिए संबंधित पोस्टर जारी किया गया है। बंदरों की प्रतीकात्मक तस्वीर संग तीनों के अलग-अलग संदेश- ‘बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो’ के जरिए ठगों से बचने का तरीका बताया जा रहा। साइबर थाना और एसपी के स्तर पर इसकी मानीटरिंग भी की जा रही।

तीन बंदरों की बात, पुलिस का सुझाव साथ

विभिन्न अपराधिक घटनाओं की केस स्टडी के बाद पुलिस ने नये अभियान को पुराने से जोड़ा है। यानी बापू के तीन बंदरों की बात को याद रखना है और पुलिस का सुझाव साथ रखना। फिर कोई ठगी नहीं कर पाएगा।

पहला संदेश ‘बुरा मत देखो’ -अक्सर लुभावनी चीजों के लोभ में आदमी फंसता है। सो, संदिग्ध व अनजान वेबसाइट लिंक से बचना, फर्जी विज्ञापन व अविश्वसनीय आफर को अनदेखा करना, अश्लील, हिंसक व आपत्तिजनक सामग्री से दूरी, अनजान के भेजे वीडियो व अन्य फाइलों को खोलने से बचने के साथ-साथ पहले वेबसाइट व लिंक की जांच करें फिर आगे बढ़े।

दूसरा संदेश ‘बुरा मत बोलो’-अनजान काल व मैसेज पर मिलनेवाले झूठे लालच में नहीं आना है, डराने-धमकाने वाले काल से घबराना नहीं है, पुलिस, बैंक या किसी भी सरकारी अधिकारी के नाम आते उनका सत्यापन करें, ओटीपी, यूपीआइ पिन आदि की जानकारी फोन पर नहीं देने के साथ-साथ किसी भी दबाव में तत्काल भुगतान नहीं करना है।

तीसरा संदेश ‘बुरा मत बोलो’-किसी को भी अपनी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी है, इंटरनेट मीडिया पर निजी जानकारी ज्यादा शेयर नहीं करनी है।

घर का पता, यात्रा की जानकारी... आदि सार्वजनिक नहीं करनी है। किसी भी अफवाह से बचना है और आपत्तिजनक पोस्ट किसी भी स्थिति में नहीं करना है।

पुलिस की ओर से जारी पोस्टर में ऐसे ही तथ्यों का उल्लेख करते हुए सुझाव दिए गए हैं- ‘देखें तो जांचें, सुनें तो परखें, बोलें तो सोचें और क्लिक करने से पहले ठहरें।’ इसके अतिरिक्त साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 व राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का पता दिया गया है।

पुलिस साइबर अपराध पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। साइबर थाने में मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। उनपर काम हो रहा। अपराधी जेल भेजे गए है। बदमाशों पर लगातार कानूनी शिकंजा कस रहा। बुरी आदतों से किनारा करना स्वयं की सुरक्षा के प्रति संजीदा होना है। ऐसा कर काफी हद तक साइबर अपराध रोका जा सकता है। पूर्व से चल रहे जागरूकता अभियान में गांधी जयंती पर एक और चैप्टर जुड़ा है।
स्वर्ण प्रभात, पुलिस अधीक्षक, पूर्वी चंपारण।