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बिहार पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन की कवायद तेज, बदल जाएगा मुखिया और सरपंच का दायरा

Published: Wed, 09 Sep 2026 05:26 PM (GMT+05:30)

Panchayat Delimitation Rules: बिहार सरकार की अधिसूचना के बाद पूर्वी चंपारण के पताही प्रखंड में पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन ...और पढ़ें

पूरी कवायद वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार मानकर की जा रही है।

पूरी कवायद वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार मानकर की जा रही है।

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संवाद सहयोगी, पताही (पूर्वी चंपारण)। Bihar Panchayat Chunav: बिहार सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद पताही प्रखंड में पंचायतों और निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से निर्धारण की प्रक्रिया तेज हो गई है।

यह पूरी कवायद वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार मानकर की जा रही है। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, पंच और वार्ड सदस्य के निर्वाचन क्षेत्रों के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

बदलेगा पंचायतों का स्वरूप

प्रखंड विकास पदाधिकारी उदय कुमार की देखरेख में परिसीमन का कार्य तेजी से संचालित किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर काम शुरू होते ही ग्रामीण इलाकों में चुनावी सरगर्मी और गुणा-गणित का दौर शुरू हो चुका है।

स्थानीय लोग अपने-अपने स्तर पर गांवों की वर्तमान आबादी और संभावित नई सीमाओं का आकलन करने में जुट गए हैं।

वर्तमान पदों की स्थिति

वर्तमान व्यवस्था के तहत पताही प्रखंड में कुल 15 पंचायतें सक्रिय हैं। यहां मौजूदा समय में दो जिला परिषद सदस्य, 15 मुखिया और 15 सरपंच के पद मौजूद हैं। इसके अलावा 21 पंचायत समिति सदस्य तथा 208 वार्ड सदस्य और इतने ही पंच के पद सृजित हैं।

तय किए गए मानक

प्रस्तावित नए मानकों के अनुसार अब सात हजार की आबादी पर एक मुखिया और इतनी ही आबादी पर एक सरपंच का क्षेत्र तय होने की संभावना है।

वहीं पांच हजार की आबादी पर एक पंचायत समिति सदस्य तथा 50 हजार की आबादी पर एक जिला परिषद सदस्य का दायरा तय किया जा सकता है।

वार्ड सदस्य और पंच के पदों का निर्धारण भी संबंधित क्षेत्र की स्थानीय जनसंख्या के घनत्व पर निर्भर करेगा।

प्रशासन की सख्त तैयारी

सीमाओं के पुनर्निर्धारण की वजह से कई पंचायतों और वार्डों के भौगोलिक स्वरूप में व्यापक फेरबदल होना तय माना जा रहा है। पदों की वास्तविक संख्या प्रारूप प्रकाशन के बाद दर्ज होने वाली दावा-आपत्तियों के निस्तारण के उपरांत ही स्पष्ट हो सकेगी।

प्रशासन ने कर्मियों को जरूरी तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हुए 10 सितंबर तक समूचे कार्य को शत-प्रतिशत पूरा करने का कड़ा लक्ष्य रखा है।