पूर्वी चंपारण में राज्यपाल का संदेश, पूर्व सैनिकों को कृषि-रोजगार से जोड़कर बनाएं सशक्त
Ex Servicemen Welfare Bihar:राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने पूर्वी चंपारण में कृषि मेले के दौरान पूर्व सैनिकों को कृषि और रोजगार से जोड़ने का आह्वान किया।

कृषि, पशुपालन व मात्स्यिकी उद्यमी उन्नयन मेला को संबोधित करते राज्यपाल। फोटो: जागरण
HighLights
राज्यपाल ने पूर्व सैनिकों को कृषि-रोजगार से जोड़ने पर बल दिया।
मोतिहारी में डिफेंस एन्क्लेव सहित कई परियोजनाओं का शिलान्यास।
देश की समृद्धि में जवान, किसान, वैज्ञानिक की भूमिका महत्वपूर्ण।
सत्येन्द्र कुमार झा, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। Governor Syed Ata Hasnain: महात्मा गांधी प्रेक्षागृह में आयोजित कृषि, पशुपालन व मात्स्यिकी उद्यमी उन्नयन मेला के दूसरे दिन बुधवार को जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान सम्मेलन का आयोजन हुआ।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा कि सीमा पर जवान, खेत में किसान और तकनीक के क्षेत्र में वैज्ञानिक देश को समृद्ध और शक्तिशाली बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि आज युद्ध का स्वरूप बदल चुका है और सीमा पर केवल सेना नहीं लड़ती, बल्कि पूरा समाज जवानों के साथ खड़ा होता है।
नागरिक और सैन्य समन्वय
राज्यपाल ने सेना में अपने 40 वर्षों के सेवाकाल का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में सिविल और मिलिट्री को साथ लेकर लड़ाई लड़ी जाती है। जब कोई सैनिक सेना में भर्ती होता है तो वह अपनी पूरी जिंदगी देश के नाम समर्पित कर देता है।
ऐसे में सैनिकों को केवल सेवा के दौरान ही नहीं, बल्कि सेवा समाप्त होने के बाद जब वे दूसरी जिंदगी शुरू करते हैं, तब भी समाज के सहयोग की आवश्यकता होती है।
पूर्व सैनिकों का सशक्तिकरण
उन्होंने बताया कि पूर्वी चंपारण जिले में लगभग छह से सात हजार पूर्व सैनिक निवास करते हैं। इन सभी पूर्व सैनिकों को कृषि और रोजगार के अवसरों से जोड़कर आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने की दिशा में ठोस प्रयास होने चाहिए।
सैनिकों को मिलने वाली कैंटीन और अन्य मूलभूत सुविधाएं उनके मनोबल को बढ़ाती हैं, जिससे सीमा पर तैनात जवान भी पूरे उत्साह के साथ देश सेवा करते हैं।
चंपारण और किसान आंदोलन
किसानों की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि महात्मा गांधी के मोतिहारी आगमन के मूल में किसान ही थे।
पंडित राजकुमार शुक्ल के विशेष आग्रह पर बापू मोतिहारी पहुंचे थे और यहीं से ऐतिहासिक सत्याग्रह की नींव पड़ी। चंपारण की इस पावन धरती से शुरू हुए इस जनांदोलन ने आगे चलकर पूरे देश के स्वतंत्रता संग्राम को एक निर्णायक दिशा दी।
अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़
उन्होंने कहा कि अन्नदाता किसानों की ताकत सिर्फ खेती-किसानी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत रखने में भी उनका बड़ा योगदान है। इससे पहले राज्यपाल ने मोतिहारी में तीन करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले डिफेंस इनक्लेव का विधिवत शिलान्यास किया।
इसके साथ ही पीपराकोठी स्थित कृषि व वानिकी महाविद्यालय में दो करोड़ रुपये से बने छात्रावास और सांसद मद से निर्मित सैनिक कैंटीन का भी उद्घाटन किया गया।
इस भव्य समारोह में सांसद राधामोहन सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद सेन गुप्ता और मेजर जनरल जितेंद्र सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के कुलपति प्रो. पीएस पांडेय और विधायक प्रमोद कुमार भी मंच पर उपस्थित थे।
कार्यक्रम में विधायक कृष्णनंदन पासवान, श्यामबाबू यादव, सचिंद्र प्रसाद सिंह और मछुआ आयोग के अध्यक्ष ललन सहनी समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए।
