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बिहार से नेपाल तक फैला था जाली नोट गिरोह का नेटवर्क, दिल्ली से होती थी सप्लाई

Published: Fri, 10 Jul 2026 07:24 AM (IST)

Bihar Fake Currency Racket: पूर्वी चंपारण पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय जाली नोट सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसका नेटवर्क ...और पढ़ें

अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े और भी अहम खुलासे होने की संभावना। फाइल फोटो

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संवाद सहयोगी, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। Bihar Fake Currency Racket: पूर्वी चंपारण पुलिस की विशेष टीम ने जाली नोट के साथ गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के बाद एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है।

शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और नेपाल तक फैला था। पुलिस के अनुसार गिरोह दिल्ली से जाली नोट मंगाकर बिहार के रास्ते नेपाल पहुंचाता था, जहां उन्हें खपाया जाता था।

इस नेटवर्क में नेपाल के कुछ लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।

भोपतपुर से संचालित होता था पूरा नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक गिरोह का संचालन भोपतपुर निवासी मो. सुलेमान अंसारी के घर से किया जाता था। यहीं बैठकर नोट डबलिंग के नाम पर लोगों को झांसा देने, जाली नोट की सप्लाई, रकम की वसूली और पूरे नेटवर्क की रणनीति तैयार की जाती थी।

जांच में सामने आया है कि गिरोह लोगों को कम समय में रकम कई गुना करने का लालच देता था। भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में असली नोट दिखाए जाते थे।

बाद में बड़ी रकम मिलने पर नोटों की गड्डी के ऊपर और नीचे असली नोट रखकर बीच में 'चिल्ड्रेन बैंक' के नोट या जाली नोट रख दिए जाते थे। कई पीड़ितों को ठगी का पता काफी देर बाद चलता था।

नेपाल तक पहुंचती थी जाली करेंसी

पुलिस का कहना है कि दिल्ली से जाली नोट मंगाने के बाद उन्हें सीमावर्ती इलाकों के रास्ते नेपाल पहुंचाया जाता था। आशंका है कि वहां इन नोटों की बड़े पैमाने पर खपत की जाती थी। जांच एजेंसियां अब सीमा पार के संपर्कों, वित्तीय लेन-देन, मोबाइल कॉल डिटेल और बैंक खातों की भी पड़ताल कर रही हैं।

पुलिस की वर्दी पहनकर बढ़ाता था भरोसा

जांच में मुफस्सिल थाना क्षेत्र के गोढ़वा निवासी मो. इम्तियाज की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार वह पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों के बीच जाता था, ताकि आसानी से उनका विश्वास जीत सके और किसी को उस पर संदेह न हो। वर्दी का इस्तेमाल गिरोह की गतिविधियों को अंजाम देने और प्रभाव बनाने के लिए किया जाता था।

कई राज्यों में फैला था नेटवर्क

पुलिस का दावा है कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई राज्यों में लोगों को नोट डबलिंग और जाली नोट के नाम पर ठगी का शिकार बना चुका है। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर कई अन्य संदिग्धों की पहचान हुई है।

उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

ऐसे हुआ पूरे सिंडिकेट का खुलासा

मंगलवार रात गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने भोपतपुर के वृत्ति टोला और मुफस्सिल थाना क्षेत्र के गोढ़वा में एक साथ छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान एक करोड़ एक लाख रुपये के संदिग्ध जाली नोट, 13.20 लाख रुपये नकद, 25 लाख रुपये के 'चिल्ड्रेन बैंक' के नोट, 38 कथित सोने के बिस्किट (फाइन एवं रोल्ड गोल्ड), एक देसी पिस्तौल, कारतूस, पुलिस की वर्दी, टोपी, बूट, चार मोबाइल फोन, एक डस्टर कार और दो बाइक बरामद की गई थीं।

इस मामले में पुलिस ने मो. सुलेमान अंसारी, मो. इम्तियाज, कोटवा निवासी बनारसी साह और कल्याणपुर थाना क्षेत्र के शंभूचक निवासी मनोज कुमार राम को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस फरार अन्य आरोपितों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।